राजेन्द्र शर्मा आवाज़ टुडे अजमेर प्रदेश के अधिकांश मेडिकल स्टोर्स पर दसवीं पास व्यक्ति अंग्रेजी दवाईयां बेच रहे हैं। नियमों को दरकिनार कर अंग्रेजी दवाईयों बेचते यह अयोग्य सेल्समैन न सिर्फ मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने में लगे है, वरन अनेक मेडिकल स्टोर्स पर तो नाबालिग लडक़े सेल्समैन बने बैठे है। ऐसा नहीं है कि सरेआम होते इस गोरखधंधे की जानकारी चिकित्सा महकमे को नहीं है लेकिन जब अधिकारियों की जेब गर्म हो जाती है तो मरीजों के स्वास्थ्य पर कौन ध्यान देता है? कारण कुछ भी हो, भुगतना मरीजों को पड़ रहा है।
प्रदेश की राजधानी जयपुर हो या मार्बल नगरी किशनगढ़, अजमेर, कोटा, जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर, बीकानेर या कोई अन्य शहर या कस्बा, सभी जगह मेडिकल स्टोर्स पर बिना निर्धारित योग्यता के अनुभव हीन व कम पढ़े-लिखे युवा सेल्समैन बनकर मरीजों को दवाईयां बेच रहे है। अनुभवहीनता के कारण ऐसे सेल्समैन मरीजों को अनेक बार गलत दवाईयां पकड़ा देते है, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। अनेक मामलों में ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को तो भनक ही नहीं लगती कि मौत का कारण बीमारी था या गलत दवा।
प्रदेश के अधिकांश मेडिकल स्टोर्स पर सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ रही है लेकिन चिकित्सा महकमा कार्यवाही न कर मरीजों की जिन्दगी से खिलवाड़ होने दे रहा है। ऐसे में मरीज व उसके परिजन शिकायत भी करे तो कहा। अब देखना है कि चिकित्सा महकमा कब दसवीं पास सेल्समेनों पर रोक लगाने संबंधि कार्रवाई कर मरीजों को राहत पहुंचाता है।
क्या है नियम :
मेडिकल स्टोर वह व्यक्ति खोल सकता है, जिसके पास नियमानुसार विज्ञान संकाय से संबंधित फार्मासिस्ट कोर्स (बी.फार्मा, डी.फार्मा, एम.फार्मा) की डिग्री या डिप्लोमा हो। उसके बाद ही चिकित्सा महकमे की ओर से उसे मेडिकल दवा बिक्री लाइसेंस दिया जाता है। लेकिन नियमों को दरकिनार कर अधिकांश मेडिकल स्टोर्स पैसों के दम पर किराए के लाइसेंसों पर चल रहे है। जब संचालक ही योग्यताधारी नहीं हो तो सेल्समेनों से क्या उम्मीद की जा सकती है।
महंगी दवाईयों की बिक्री :
मेडिकल स्टोर्स पर मरीजों व उनके परिजनों को लूटने का धंधा भी धडल्ले से चलता है, सेल्समेन व संचालक अधिकांश मामलों में मरीजों को सस्ती के स्थान पर महंगी दवाईयों ही देते है। साथ ही अनेक सेल्समेन तो मुद्रित मूल्य से अधिक राशि भी ले लेते है। रोगी के परिजन अक्सर जल्दी में होने के कारण इस ओर ध्यान ही नही दे पाते।
इसलिए रखते है
अयोग्य सेल्समैन :
मेडिकल स्टोर्स पर कार्य करने वाले सेल्समैन की निर्धारित योग्यता फार्मासिस्ट होना अनिवार्य है लेकिन योग्यताधारी व्यक्ति कम वेतन पर नहीं मिल पाते, ऐसे में बिना योग्यता वाले व्यक्ति को अंग्रेजी दवाईयों के नाम का तजुर्बा होने की बात कहकर कम वेतन पर सेल्समेन बना दिया जाता है।
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