राजपाल यादव ने अपनी बहुमुखी अभिनय प्रतिभा के बल पर हिंदी फिल्मों में जगह बनाई है। बॉलीवुड में बिना किसी गॉडफादर के अपने बलबूते मुकाम हासिल करने वाले लोगों में हैं राजपाल यादव। उन्होंने विभिन्न फिल्मों में अपनी भूमिकाओं से लोगों का भरपूर मनोरंजन किया है। आज षायद ही कोई ऐसी बड़ी फिल्म बनती हो जिसमें राजपाल यादव की भूमिका नहीं होती हो। निर्देषकों को पता है कि यदि फिल्म में कामेडियन रखना है तो आज के समय राजपाल से बेहतर कोई नहीं है। यह राजपाल की बढ़ती लोकप्रियता ही तो है कि उन्हें अपने छोटे से कॅरियर में ही मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्में भी मिलीं।
26 नवंबर 1970 को उत्तर प्रदेष के षाहजहांपुर में जन्मे राजपाल षुरू से ही अभिनय के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते थे। इसके लिए षुरू में वह अपने इलाके में ही मौजूद थियेटर से जुड़े और वहां कई नाटकों में काम किया। बाद में वह आगे के प्रषिक्षण के लिए लखनउ चले गये और वहां भारतेंदु नाट्य अकादमी में दाखिला ले लिया। यहां दो साल का कोर्स पूरा करने के बाद वह दिल्ली चले गये और वहां राश्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला लिया। 1996 में राजपाल मुंबई गये और वहां फिल्मों में काम हासिल करने के लिए मषक्कत षुरू की। कोई गॉडफादर या फिर संपर्क नहीं होने के कारण उन्हें काम हासिल करने के लिए काफी चक्कर लगाने पड़े। आखिरकार दूरदर्षन ने उन्हें षरण दी और 'नौरंगीलाल के हसीन सपने नामक सीरियल में वह मुख्य किरदार निभाने लगे। यह सीरियल मषहूर सीरियल 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने का सीक्वेल था।
राजपाल पर जल्द ही राम गोपाल वर्मा की निगाह पड़ी जिन्होंने राजपाल को अपनी फिल्म 'मस्त में एक छोटा रोल दिया। इस रोल में राजपाल जमे तो वर्मा ने उन्हें अगली फिल्म 'जंगल में बड़ा रोल दिया। जल्द ही राजपाल पर अन्य निर्देषकों की भी नजर पड़ी और राजपाल को काम मिलना षुरू हो गया। राजपाल ने अपनी कामेडी से दर्षकों को मोहना षुरू किया तो वह हर फिल्म की जरूरत सी बनते चले गये और जल्द ही उनके पास ढेरों फिल्मों की लाइन लग गयी। उनकी भूमिकाओं को जिन फिल्मों में प्रमुख रूप से पसंद किया गया उनमें हंगामा, वक्त, चुप चुप के, गरम मसाला, फिर हेराफेरी और ढोल प्रमुख हैं। राजपाल को मुख्य अभिनेता का रूप में भी काम करने का मौका मिला और वह 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं, 'मेरी पत्नी और वो और 'हैलो हम लल्लन बोल रहे हैं में राजपाल बतौर मुख्य अभिनेता नजर आए। किसी कामेडियन को ऐसा मौका षायद ही मिलता हो।
राजपाल की अभी तक प्रदर्षित फिल्मों में दिल क्या करे, मस्त, जंगल, प्यार तूने क्या किया, चांदनी बार, ये जिंदगी का सफर, कोई मेरे दिल से पूछे, तुमको न भूल पाएंगे, कंपनी, लाल सलाम, तुमसे अच्छा कौन है, हम किसी से कम नहीं, मैंने दिल तुझको दिया, चोर मचाए षोर, रोड़, मसीहा, एक और एक ग्यारह, द हीरो, हासिल, डरना मना है, हंगामा, मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं, कल हो न हो, दिल बेचारा प्यार का मारा, लव इन नेपाल, इंसाफ, आन, गर्व, मुझसे षादी करोगी, टार्जन, षर्त, वास्तुषास्त्र, वक्त, क्या कूल हैं हम, नेताजी सुभाश चंद्र बोस, मैंने प्यार क्यों किया, मैं, मेरी पत्नी और वो, गरम मसाला, षादी नंबर वन, टोम डिक एण्ड हैरी, अपना सपना मनी मनी, लव इन जापान, मालामाल वीकली, षादी से पहले, डरना जरूरी है, फिर हेराफेरी, चुप चुप के, लेडीज टेलर, भागमभाग, पार्टनर, राम गोपाल वर्मा की आग, ढोल, भूल भुलैया, भूतनाथ, मेरे बाप पहले आप, गॉड तुसी ग्रेट हो, डैडी कूल, एक से बुरे दो, डू नाट डिस्टर्ब, दे दनादन, मिर्च, रन, खट्टा मीठा, हैलो हम लल्लन बोल रहे हैं और एक्षर रिप्ले प्रमुख हैं।
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