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सोमवार, 9 जनवरी 2012

तेंदुलकर के मुकाबले भारतीय क्रिकेट का क्या मिला ?


सचिन तेंदुलकर नाम आज किसी का मोहताज नहीं है। क्रिकेट की शायद ही कोई उपलब्धि है जो इस महान क्रिकेटर को नहीं मिली हो। उपलब्धियों के साथ ही धन व ऐश्वर्य की बात तो पूछो ही मत। अब इन्हीं उपलब्धियों के चलते मास्टर ब्लास्टर सचिन को भारत रत्न देने तक की बात होने लगी है लेकिन सचिन से भारतीय क्रिकेट को क्या मिला। यह बात भी गौर करने लायक है जब सचिन भारतीय क्रिकेट में नहीं रहेंगे तो उनकी उपलब्धियां व उनका कमाया धन उनको किसी तरह की कमी नहीं होने देगा लेकिन सचिन के न रहने से भारतीय क्रिकेट का क्या होगा। इस पर सोचने वाली बात है। भारत ने क्या पाया, क्रिकेट ने क्या पाया, सब कुछ तो सचिन तेंदुलकर ने पाया है, इसलिए इस प्रश्न का उत्तर ईमानदारी के साथ आना चाहिए कि भारत को क्या मिला। यह प्रश्न सचिन तेंदुलकर और उनके उन समर्थकों से है जो केवल सचिन तेंदुलकर की उपलब्धि के नाम पर नाच रहे हैं और वह उस सच्चाई से दूर भाग रहे हैं जिसमें भारत का खाता खाली पड़ा हुआ है। 

देखा गया है कि जब भी किसी प्रतिष्ठापूर्ण मैच में भारत फंंसा है तब तेंदुलकर साहब एक रन बनाकर या जीरो पर आउट होकर पेवेलियन पर आकर बैठ गए और उस फंसे हुए मैच को अंतिम तीन चार विकटों के साझेदारों ने निकाला। ऐसे कितने उदाहरण हैं जिनका उल्लेख यहां किया जा सकता है। जब अकेले सनत जयसूर्या के बल्ले के दम पर श्रीलंका विश्वकप का सिरमौर हो सकता है तो भारत क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बल्ले के दम पर विश्वकप का सिरमौर क्यों नहीं हो पाया। दुनिया में इन दो दशकों में क्रिकेट के पंडितों ने तेंदुलकर की महिमा का बखान करने में बड़े बड़े ग्रंथों को पीछे छोड़ दिया है लेकिन भारतीय क्रिकेट पर किसी ने नहीं लिखा। किसी दूसरे देश की धरती पर जब भारतीय क्रिकेटर खेलते हैं तो वह तेंदुलकर, गांगुली, सहवाग, धोनी या सिद्धू नहीं खेलते हैं तब भारत खेलता है। जब भारत जीतता है तो कहते हैं कि तेंदुलकर की बदौलत जीत गया और जब भारत हारता है तो उसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं होता। यहां तेंदुलकर जीतता है और भारत हारता है। तेंदुलकर ने दोहरा शतक लगाया पर भारत के काम न आया यह एक अपवाद है लेकिन अधिकांशतया तेंदुलकर की क्रिकेटरी उपलब्धियां भारत के काम न आ सकीं। हर एक महत्वपूर्ण अवसरों पर इस खिलाड़ी ने भारतीय जनमानस को भारी निराश किया है इसलिए वह बारह हजार रन बना ले बारह हजार शतक बना ले इससे क्या हुआ भारत तो नहीं जीता। 

भारतीय मीडिया धन्य है। ध्यान रहे कि दूसरे देशों में आज भी भारतीयों को अभी एक गाली से अभी मुक्ति नहीं मिली है, भले ही पूरा हिंदुस्तान दुनिया में अपनी उपलब्धियों का डंका बजाता हुआ घूम रहा हो। मीडिया ने इसी प्रकार क्रिकेट खिलाडिय़ों को भी महिमा मंडित करके ऐसे उपनामों से नवाजा है कि जिसमें तेंदुलकर जैसे क्रिकेट खिलाड़ी अपने देश को भूलकर रनो के पीछे दौडऩे लगे और भारत रनआउट हो गया।

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