
इंटरनेट दुनिया भर में फैले कम्प्यूटरों का एक विशाल सजाल है, जिससे ज्ञान एवं सूचनाएं भौगोलिक एवं राजनीतिक सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए अनवरत प्रवाहित होती रहती है। इंटरनेट के विश्वव्यापी जाल पर सुगमता से अद्यतन सूचनाएं प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त यदि अपने पास ऐसी कोई सूचना है जिसे हम सम्पूर्ण दुनिया में प्रसारित करना चाहें तो उसका हम घर बैठे इंटरनेट से वैश्विक स्तर पर विज्ञापन कर सकते हैं। इंटरनेट पर सब कुछ अच्छा ही नहीं है। उसे माध्यम बनाकर आर्थिक और सामाजिक अपराध भी किए जाते हैं। ई-मेल से वायरस, स्पाईवेयर और एडवेयर भेजना, लोगों को झूठे प्रलोभन देकर धन मंगवाना, बैंकों और क्रेडिट कार्डों के आंकड़े पासवर्ड आदि चुराकर उनका दुरूपयोग करना, लोगों की निजी सूचनाएं चुराना, बच्चों और महिलाओं के साथ यौन व्यवहार करना आदि साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है।
इंटरनेट का प्रारंभ आज से लगभग साढ़े तीन दशक पूर्व अमेरिका के रक्षा विभाग के एक शोध प्रकल्प के रूप में हुआ। सन् 1992 के बाद इंटरनेट पर ध्वनि एवं विडियों का आदान प्रदान संभव हो गया।
साइबर क्राइम का एक अन्य रूप है-हैकिंग। इसका अर्थ है किसी सर्वर, वेबसाइट या ई-मेल प्रणाली का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेना। इन घटनाओं में कई बार संवेदनशील आंकड़े चुरा लिए जाते हैं जिनका दुरूपयोग किया जाता है। न केवल भारत के परिपेक्ष्य में बल्कि सम्पूर्ण विश्व में इंटरनेट का दुरूपयोग करते हुए आतंकवादी संगठनों द्वारा कई विध्वंसकारी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। इंटरनेट अपराधियों से बचने के लिए सावधानी बहुत जरूरी है। अलबता कम्प्यूटर अच्छे एंटी वायरस, एंटी-स्पाईवेयर और फायरवाल साफ्टवेयरों का प्रयोग कर हम काफी हद तक इनसे बच सकते हैं। ई-मेल, वेबसाइटों आदि में दिए जाने वाले लिंक्स पर आंख मूंदकर क्लिक नहीं करना चाहिए और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हुए बिना वेबसाइटों से साफ्टवेयर, विडियो, फाइलें आदि डाऊनलोड नहीं करना चाहिए।
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