
इसके अलावा नए खिलौने, गेम्स जो भी प्रचलन में होते हैं, बच्चों की फरमाइश पर हाजिर हो जाते हैं। जब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं, तब भी फैशन के बैगए कम्पास, पेंसिल, रबर लाकर ही दिए जाते हैं। उनके पास नहीं भी होते हैं, तो वे अपने दोस्तों के पास देखकर आकर्षित होते हैं और नई-नई चीजें लाने की मांग करते हैं।
समय के साथ चलती यह जागरुकता ही कहिए जिससे वे स्वयं को अलग सा दिखाना चाहते हैं और अपने को नए रूप में स्थापित करना चाहते हैं। सबके आकर्षण का केंद्र बन सके, दोस्तों के दिल में समां सके, शिक्षकों व रिश्तेदारों की प्रशंसा पा सके, इसलिए वे जमाने के नित नए फैशन को अपनाना चाहते हैं।
वे सोचते हैं कि वर्तमान में जो फैशन चल रहा है, अगर उसे नहीं अपनाएंगे तो हम ओल्ड फैशन की उपाधि से अलंकृत हो जाएंगे। लेकिन कई बार वे यह नहीं सोच पाते हैं कि जो भी फैशन चल रहा उससे मा-बाप और निकटवर्ती लोगों में हमारी छवि कैसी बनेगी। यह भी है कि फैशन के इस दौर में फैशन के साथ चलने के लिए बच्चे ब्रांडेड कंपनी की वस्तुओं को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
जैसे-जूते यदि ब्रांडेड कंपनी के हों चाहे वह कम पसंद आ रहे हैं और वहीं दूसरे लोकल ब्रांड जूते उससे कहीं अच्छे भी हों तो भी जागरुक बच्चे ब्रांडेड कंपनी के जूते ही पहनना पसंद करेंगे। इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है कि साफ.सुथरे, सलीके से तैयार बच्चे सभी को अच्छे लगते हैं। वे अनायास ही सबको आकर्षित कर लेते हैं।
एक पहलू यह भी है कि यदि बच्चे फैशन के अनुसार न रहें या जिस माहौल में वे रह रहे हैं, उसके अनुरूप स्वयं को ढाल न पाएं तो उनमें हीन भावना जल्दी ही घर कर जाती है और उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। यदि बच्चे इस स्थित में पहुंच जाएं तो उनके लिए सफलता पाना अत्यंत ही कठिन हो जाता है। अत: फैशन के साथ चलना आज की आवश्यकता बन गया है। ऐसे में जरूरत है कि फैशन के साथ चलिये लेकिन अंधे मत दौडिए। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे फैशन संबंधि अपने अनुभवों से बच्चों को सही-गलत का ज्ञान दे। तभी बच्चे सही दिशा में बढ़ पाएंगे।
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