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बुधवार, 18 जनवरी 2012

कम्प्यूटर में वायरस कैसे?

वायरस कम्प्यूटर का दुश्मन है। कम्प्यूटर को वायरस से बचाने का प्रयास करना अति आवश्यक है। कम्प्यूटर में वायरस कैसे आता है? कम्प्यूटर में वायरस मुख्यतः दूषित एवं भ्रष्ट फ्लॉपियों के प्रयोग से होता है। वायरस कम्प्यूटर में घुस कर मौका पाते ही सिस्टम में उपस्थित जानकारी को  ज्यादा से ज्यादा फ्लापियों में नुकसान पहुंचाता है। वायरस एक प्रोग्राम होता है जो कम्प्यूटर प्रोग्रामरों द्वारा बनाया जाता है। यह प्रोग्राम जब किसी फ्लॉपी में होता है। और उस फ्लॉपी को कम्प्यूटर की ड्राइव में लगाकर शुरू करते हैं तो यह प्रोग्राम कम्प्यूटर की मेमोरी नष्ट या भ्रमित कर देता है। यानि कम्प्यूटर में वायरस किसी ऐसी फ्लॉपी को चलाने से आता है जिसमें पहले से ही वायरस का प्रोग्राम हो। वायरस दूषित प्रोग्रामों को चलाने से या कम्प्यूटर नेटवर्क पर दूषित प्रोग्रामों की भागीदारी से भी आता है। इसे वायरस नष्ट करने वाले प्रोग्राम से हटाना होता है या पूरी फ्लॉपी अथवा डिस्क को फारमेट करना पड़ता है। 

‘क्रेडिट कार्ड’ कैसे शुरू हुआ?

आजकल क्रेडिट कार्ड का चलन  काफी है। क्रेडिट कार्ड का महत्व निरन्तर बढ़ता जा रहा है। क्रेडिट कार्ड की शुरुआत का श्रेय मूलतः अमेरिका को है। अमेरिका से शुरू हुआ क्रेडिट कार्ड का चलन आज सभी को लाभदायी साबित हो रहा है। पचासों वर्ष पहले अमेरिका के उद्योगपति ‘फ्रैंक मैक्नमरा’ एक होटल में गए, वहां खाना खाने के बाद बिल का भुगतान जब करने लगे तो पाया कि जेब में पैसा ही नहीं है, वह अपना पर्स घर पर ही भूल आये थे। घर से पैसा मंगा कर भुगतान किया और उसी समय से उनका दिमाग चलने लगा कि कौन सा ऐसा उपाय किया जाए कि यदि पास पैसा न हो तो भुगतान का उचित और सम्मानित उपाय बन जाय। अंततः उन्होंने सन् 1950 में डायनर्स क्लब द्वारा सबसे पहले क्रेडिट कार्ड शुरू किया उसके बाद व्यापारिक संस्थाओं ओर बैंकों ने इस चलन को लागू किया। 

‘एलर्जी’ किसे कहते हैं?

कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं कि उनका उपचार कराने के लिए जैसे ही किसी चिकित्सक के पास पहुंचे तो पता चलता है कि एलर्जीं हो गयी है। गर्मियों के दिनों में एलर्जी हो जाना आम बात है। एलर्जी किसी एक चीज से नहीं कई प्रभावों से होती हेै। एलर्जी क्या है? -रोगाणुओं से रक्षा करने की शरीर में एक विशेष रक्षा प्रणाली होती हैं। यह प्रणाली ही तमाम तरह के रोगों और संक्रामक जीवाणुओं के साथ ही हानिकारक पदार्थों के द्वारा शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हे। जब जिस जगह पर इस कणिकाओं का प्रकोप ज्यादा हो जाता है और उसका  कुप्रभाव रोग के रूप में जो सामने आता हेै  उसे ‘एलर्जी’ कहते हैं। 

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