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बुधवार, 4 जनवरी 2012

जब पेन नहीं था तो कैसे काम करते थे लोग ?


 कलम की ताकत से पूरी दुनिया वाकिफ है। आधुनिक युग में यह विचारों की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब पेन का अविष्कार नहीं हुआ था तो लोग अपने विचार कैसे दर्ज करते थे? और मानव की कौन सी जरूरतों से पेन का अविष्कार हुआ। आइए एक नजर डालते हैं पेन के अविष्कार और उसके विकास के सफर पर। इसमें कोई दो राय नहीं कि मनुष्य की सोचने की क्षमता इस आधुनिक युग का पथ है। उस सोच को शब्द देने के लिए प्राचीन काल के लोग नुकीली छैनी से अपने विचारों को तस्वीरों या चिन्हों के रूप में गुफाओं की दीवारों पर खुरचते थे। इसके बाद वह पौधों के रस या जानवरों के खून में अपनी उंगलियां डुबाने लगे ताकि उन्हें कलम के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। फिर मिट्टी और चाक टुकड़ों को इस काम के लिए प्रयोग किया गया। चीनी तो अपने खेतों को ऊंटों के बालों से बने ब्रश से पेंट करते थे। जबकि कुछ दशक पहले तक सरकंडे की कलम का इस्तेमाल किया जाता था। तख्ती पर आज भी उसी से लिखा जाता है। इंसान की इसी सोच ने पेन का जन्म दिया। वैसे सभ्यता के विकास में लिखने की कला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके जरिए मानव अपने विचारों और कारनामों को रिकॉर्ड कर सकता है।


आधुनिक पेन जिसे हम सभी आज इस्तेमाल करते हैं सबसे पहले किसने बनाया? 

इसका किसी के पास ठोस जवाब नहीं है। लेकिन इस दिशा में पहला नाम मिस्र के लोगों का आता है। वे एक कॉपर के टुकड़े को, जो आधुनिक स्टील पेन पाइंट की तरह होता था, एक खोखली स्टैप के सिर पर बांध कर पेन की तरह इस्तेमाल करते थे। वैसे हाथ से खत लिखने का सिलसिला यूनानियों ने सबसे पहले लगभग 4000 साल पहले शुरू किया था। वे धातु हड्डी और हाथी दांत से बने पेन का प्रयोग करते थे और उससे मोम चढ़ी शिलाओं पर लिखते थे। इसके बाद उन्होंने ट्यूब जैसे खोखली श्रवास से एक स्पलिंट पेन बनाया जिसे इंक में डुबोकर लिखने के लिए काम में लाया जाता था।

लेकिन अभी तक कागज का आविष्कार नहीं हुआ था। मध्य युग में कागज का आविष्कार हुआ, उस वक्त तक आदमी बत्तख, कौवे या हंस के परों को कलम के रूप में प्रयोग करने लगा था। उसकी टिप को नुकीला बनाकर बीच में से फाड़ दिया जाता था ताकि इंक चैनल से बहकर कागज पर आ जाए। लेकिन कलम का पेन नाम किस तरह पड़ा इसके पीछे भी एक कहानी है। पेन लातिनी भाषा के पैन्ना शब्द से बना है। जिसका अर्थ है पंख यानी पर। पुरातत्वविदों के मुताबिक 1 हजार बरस तक लोगों ने परों के पेन से ही लिखा।

1780 में सबसे पहले इंग्लैंड में स्टील पेन बने, लेकिन इन्हें शोहरत इसके 40 साल बाद मिली। फाउंटेन पेन अमेरिका में 1880 में बनना शुरू हुआ। इनका निब आमतौर पर 14 कैरेट सोने का बना होता था और उस पर इरीडियम चढ़ा होता था ताकि कागज को बिना फाड़े आसानी से लिखा जा सके। आजकल तो बाल पाइंट पेन का ही चलन है। इसका आविष्कार 20वीं शताब्दी में हुआ और इसका फाइंट क्रोम स्टील से बना होता है। इसलिए तो यह इतना सस्ता है।

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