
वैज्ञानिकों के मुताबिक, बेसुरे पक्षी की आवाज भी सुबह में बड़ी प्यारी होती है। इसकी वजह नींद में पक्षियों का अभ्यास करना है। हालांकि सुबह उनकी आवाज में थोड़ी लड़खड़ाहट भी होती है। लेकिन कुछ ही देर में उनका बिगड़ा सुर सुरीला बन जाता है और वे सधे गायक बन जाते हैं। इसकी वजह पक्षियों में सुनने और गुनगुनाने की प्रक्रिया का लगातार अभ्यास करना भी है। जब पक्षियों का मस्तिष्क गीत सीखने के लिए अच्छी तरह परिपक्व हो जाता है, वे बड़ों का गीत ध्यानपूर्वक सुनकर उसकी नकल भी उतारते हैं। कई पक्षियों में दूसरे पक्षियों की आवाजों की हूबहू नकल उतराने की क्षमता भी होती है। गीत गाने वाले पक्षियों में सीखने की प्रक्रिया इंसान की बोली के विकास की तरह ही होती है। गाने की नकल करने के पहले नए पक्षी भी तुतले और कर्कश ध्वनि में आवाज निकालते हैं। ठीक उसी तरह जैसे कोई बच्चा शब्दों को बोलने के पहले तुतलाता है। अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक किशोर पक्षियों में नींद के दौरान दिलचस्प घटनाएं घटती हैं। गहरी नींद में सोते ही उनमें सपने की तरह गीत का अभ्यास शुरू हो जाता है लेकिन यह वहां से आरंभ नहीं होेता है, जहां से उन्होंने रात के पहले गाना बंद किया था। बल्कि हर रोज एक नई प्रक्रिया शुरू होती है जो धीरे-धीरे उन्हें श्रेष्ठतम गायक बनाती है। हालांकि यह रहस्य अभी भी पूरी तरह उजागर नहीं हुआ है। लेकिन अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि गायन के दौरान मस्तिष्क के जिस हिस्से का उपयोग होता है, वह रात्रि के दौरान सक्रिय हो जाता है।
न्यूरॉन जो कि पक्षियों के गायन के समय सक्रिय होता है, रात के दौरान ज्यादा सक्रिय हो जाता है। इसीलिए यह संभव है कि रात को पक्षी गाने के बारे में सपने देखते हैं। लेकिन हैरानी में डालने वाली बात यह है कि पक्षी गहरी नींद के दौरान अगर गीत का अभ्यास कर रहे होते हैं तो फिर सुबह उसकी आवाज तुतला क्यों हो जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसकी वजह बिना किसी निर्देशन या टीका टिप्पणी के स्वयं अभ्यास करना हो सकता है। सपने में पक्षी अपना गीत नहीं सुन पाते हैं क्योंकि तब किसी तरह की ध्वनि उत्पन्न नहीं होती है। इसीलिए उनके लिए यह समस्या होती है, क्योंकि उन्हें ध्वनि के बारे में प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। हालांकि यह पहले ही साबित हो चुका है कि बड़े पक्षी जो अपनी आवाज सुन नहीं पाते हैं, जल्द ही टूटा-फूटा गाना सीख लेते हैं। यही सिद्धांत सपने देखने वाले युवा पक्षियों पर भी लागू होता है। उसकी आवाज इसलिए बिगड़ जाती है, क्योंकि वे स्वयं की आवाज सुन नहीं पाते हैं। जिन पक्षियों की आवाज रात के दौरान खराब हो जाती है वे अच्छे गायक साबित होते हैं, क्योंकि इस दौरान उनका दिमाग सर्वाधिक लचीला होता है।
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