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शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

विमान हादसों की वजह बताता है ब्लैक बॉक्स

ब्लैक बॉक्स से न केवल विमान की दुर्घटना के कारणों का पता चलता है बल्कि दुर्घटना के पहले काकपिट और विमान कंट्रोल कक्ष के बीच हुई बातचीत का भी पता चलता है। किसी विमान हादसे की वजह क्या थी, इन घटनाओं में किसका हाथ था और किस कारण से विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ इसका पुख्ता पता लगाने का एकमात्र जरिया ब्लैक बाक्स होता है।
ब्लैक बॉक्स विमान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले पिछले भाग में लगा होता है। भीशण से भीशण दुर्घटना में भी यह नश्ट नहीं होता। इसकी मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह 1100 डिग्री सैंटीग्रेट तापमान में और 500 पौंड के कठोर स्टील को इस पर 10 फुट से गिराने पर भी क्षतिग्रस्त नहीं होता है। ब्लैक बॉक्स बनाने से पहले इसकी मजबूती के कई परीक्षण किए जाते हैं। जिनमें इसको बहुत भारी गुरुत्व बल, 500 पौंड का वायुदाब प्रहार और 24 घंटे तक समुद्री जल में दबाव में रखा जाता है।
ब्लैक बॉक्स दो रंगों का होता है। इस बॉक्स में दो बक्से होते हैं। काकपिट वायस डाटा रिर्काडर काले रंग का होता है जबकि फ्लाइट डाटा रिकार्डर गहरा लाल या नारंगी रंग का होता है। इसका नाम ब्लैक बॉक्स इसलिए रखा गया है कि काकपिट वायस डाटा रिकार्डर के अंदर फ्लाइट डाटा रिकार्डर होता है और इस प्रकार बाहर से यह काला ही दिखाई देता है। ब्लैक बॉक्स को खोलकर अंदर से फ्लाइट डाटा रिकार्डर निकाला जाता है। जिसमें दुर्घटना के वक्त और उससे पहले की सारी जानकारियां रिकॉर्ड होती हैं।
विमान की पूंछ में लगे ये उपकरण सीधे ही कॉकपिट में लगे माइक्रोफोन से जुड़े होते हैं। इन बॉक्सों में ध्वनि प्रसारक यंत्र भी लगे होते हैं और ये एक विषेश प्रकार की बैटरी से जुड़े होते हैं। यह बैटरी सुसुप्त बनी रहती है और दुर्घटना होने की स्थिति में अपने ही चालू हो जाती है। यह बैटरी एक विषेश प्रकार की आवाज करती है और एक बार चालू हो जाने पर इसमें 90 दिन तक चलने की क्षमता होती है।

ब्लैक बॉक्स में मौजूद फ्लाइट डाटा रिकार्डर यानी एफडीआर विमान की उड़ान संबंधी जानकारियां, विमान की गति, समय, गुरुत्व बल, विमान के ऊपर नीचे होने की स्थिति, गति और दूसरी जरूरी जानकारियां इसमें लगी धातु की पतली पट्टी पर ज्यों का त्यों रिकार्ड होती हैं जिससे दुर्घटना का कारण और समय का पता लगाया जाता है। आधुनिक विमानों में फ्लाइट डाटा रिकार्डर उपयोग में लाए जाते हैं। इसमें चुम्बकीय टेप का उपयोग किया जाता है। जिसे साधारणतः 200 उड़ानों के बाद बदला जाता है और इस प्रकार बार-बार फ्लाइट डाटा रिर्काडर को बदलने की आवष्यकता नहीं रहती है। डीएफडीआर के द्वारा विमान और उसके रिकॉर्डर को बदलने की आवष्यकता नहीं रहती है। डीएफडीआर के द्वारा विमान और उसके इंजनों से संबंधित 50 से अधिक जानकारियां जैसे कि इंजनों की षक्ति, गति और दबाव, यात्री कक्ष का तापमान, रेडियो संपर्क का समय, अवतरण आदि जानकारियां प्राप्त की जाती हैं। इस प्रकार डीएफडीआर दुर्घटना की अधिक जानकारी देता है।

कॉकपिट वायस रिकॉर्डर यानी सीवीआर के द्वारा विमान के चालक कक्ष काकपिट में हुई बातचीत और रेडियो पर की गई बातचीत, चालक कक्ष में बजने वाली घंटी, विमान के इंजनों का षोर आदि रिकार्ड किए जाते हैं। इस प्रकार सीवीआर में घरेलू टेपरिकार्डर की तरह सभी बातें एक सुदृढ़ ढांचे में सुरक्षित रूप से स्वतः रिकार्ड हो जाती हैं। यह रिकार्डिंग विमान के इंजन बंद होने के साथ ही बंद हो जाती है।

इस प्रकार ब्लैक बॉक्स से न केवल दुर्घटना के कारणों का पता चलता है बल्कि दुर्घटना के पूर्व काकपिट और विमान में हुई घटनाओं का भी पता चल जाता है।

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