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सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

सफलता का आईना हो आपका रिज्यू मे

आज के प्रतिस्पर्धा भरे माहौल में आपको दूसरों से अलग बनाती हैं आपकी सफलताएं। यहां हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, ताकि आपके रिज्यूमे में आपकी सफलताएं भली-भांति प्रदर्शित हों। जहां प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है, वहां केवल योग्यता और कार्यानुभव के दम पर अच्छी नौकरी पाना आसान नहीं है। ऐसे में आपकी छोटी-बड़ी सफलताएं ही हैं, जो आपको अन्य लोगों से आगे रखती हैं। आप किसी कंपनी के लिए कितने तरीके से लाभदायी सिद्ध हो सकते हैं, इस बात को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसे बताने के लिए जरूरी है कि आपका रिज्यूमे बेहतरीन तरीके से तैयार किया जाए, जो आपको साधारण आवेदक की श्रेणी से विशेष की श्रेणी में पहुंचाएगा।
उत्तरदायित्वों को पेश करें
अपना रिज्यूमे तैयार करने का एक बढ़िया तरीका है कि आप शब्दों का चयन चतुराई से करें। यहां तक कि जब आप अपने कार्य उत्तरदायित्वों की बात करें तो उन्हें ऐसे पेश करें कि वे आपकी सफलताएं नजर आएं। मिसाल के तौर पर..
पहले: उत्तरी क्षेत्र में सेल्स की जिम्मेदारी।
अब: समूचे उत्तरी क्षेत्र के सेल्स प्रमुख।
देखिए कैसे ‘जिम्मेदारी’ की जगह ‘प्रमुख’ क्रिया का इस्तेमाल करते ही रिज्यूमे आपकी जो छवि बनाता है, उसमें कितना अंतर दिखाई देने लगा है। अगर एक रिज्यूमे में सिर्फ आपके उत्तरदायित्वों का ही जिक्र होता है तो किसी भी कंपनी को यह बिल्कुल समझ में नहीं आता कि आप असल में करते क्या थे! साथ में उन्हें बमुश्किल ही पता चल पाता है कि आप उनके लिए क्या कर सकते हैं। इस बात का खास ख्याल रखें कि अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियों को बताने के लिए दमदार क्रिया-शब्दों जैसे लेड, इनीशिएटेड, स्पीयरहेडेड, कंट्रोल्ड, एक्सेलरेटेड, अटेंड, कॉन्सेप्चुलाइज्ड, कंडक्टेड, डिवाइस्ड, डायरेक्टेड, ड्राफ्टेड, एक्जीक्युटेड, एन्हैंस्ड, एस्टेब्लिश्ड आदि का इस्तेमाल करें। इन शब्दों के माध्यम से आपकी छवि एक सक्रिय कर्मचारी की बनेगी और कंपनी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जब आप यह कहेंगे कि आपको क्या हासिल हुआ, बजाए इसके कि आप क्या संभालते थे तो आपकी छवि एक उत्तरदायी और पहल करने वाले कर्मचारी के रूप में बनेगी, न कि सिर्फ ऐसे व्यक्ति के रूप में, जो केवल दिया हुआ काम ही पूरा करता है। जिम्मेदारियों के बारे में बताएं
किसी कंपनी को यह बताना भी बेहद महत्वपूर्ण है कि आप अपने काम को कितने अच्छे तरीके से संभालते हैं। इसके लिए भी आपको ‘रिस्पॉन्सिबल फॉर’ से कुछ अधिक कहना होगा, जैसे..
पहले: कंपनी में एमआईएस इंटरफेस की जिम्मेदारी।
अब: नए मार्केट्स की तलाश और क्लाइंट्स को बेहतर सेवा देने के लिए एमआईएस के साथ तकनीकी तरक्की के लिए कार्य (इंटरफेस)।
पहले जो रिज्यूमे में लिखा गया है, उससे कंपनी के दिमाग में यह बात स्पष्ट नहीं होती कि आप कितने प्रभावी तरीके से अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, वहीं दूसरे मामले में ‘इंटरफेस’ शब्द ने आपको एक सक्रिय आवेदक के रूप में प्रस्तुत किया है। इस तरह किसी भी कार्य के साथ जुड़ने ने यह दिखा दिया है कि आपका इसमें क्या योगदान रहा और यही आपकी सफलता भी है। साथ ही इससे कंपनी को यह भी समझ में आ गया कि भविष्य में आप किस प्रकार से उन्हें योगदान दे सकते हैं। दरअसल हम एक बेसिक रिज्यूमे में अपने संपर्क की जानकारी, अपना उद्देश्य, अपने बारे में जानकारी, कार्यानुभव, अतिरिक्त गतिविधियां और दूसरी जानकारी देने में काफी जल्दबाजी करते हैं। हम अक्सर ऐसी जगह आकर रुक जाते हैं, जहां हमें वास्तव में अपनी वर्तमान कंपनी में अपने योगदान का जिक्र करना चाहिए। एक दमदार रिज्यूमे का मुख्य तत्व ‘प्रमाण’ होता है। प्रमाण इस बात का कि आपने रिज्यूमे में जो कुछ भी कहा है, आप उसकी इज्जत रखेंगे - और यह प्रमाण आपके वाइटल स्टेटस में होता है, जिसमें तथ्य व आंकड़े या परिणाम दर्शाने वाले कथन होते हैं। ये सब आपके वर्तमान कार्य को दर्शाते हैं व आपको एक सफल व कार्य करने के इच्छुक कर्मी के रूप में साबित करते हैं।

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