युवाओं को नहीं रास आ रही खेती
आपको मालूम है कि लगातार बढ़ती महंगाई का क्या कारण है? जान लीजिए ! मांग के अनुरूप पैदावार न होना। जी हां पिछले कुछ वर्षो से जिस तरह विकास की आंधी चली है उस गति से कृषि उत्पादन में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। सूखा एवं बाढ़ का प्रकोप कृषि उत्पादन में और कमी कर रहा है। विदित हो कि आजादी के एक दशक बाद ही देश में कृषि उत्पादन की कमी का अहसास होने लगा था। देश को अपनी जरूरत के लिए विदेशों से अनाज का आयात करना पड़ता था। इसी को देखते हुए स्व0 लाल बहादुर शास्त्री ने देश में हरित क्रांति का नारा दिया था। कृषि के लिए तमाम संसाधन जुटाये गये। रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों के संयंत्र लगाये गये सिंचाई के लिए नहरों का जाल बिछाया गया जिसका परिणाम यह हुआ देश कुछ सालों े अन्दर आत्मनिर्भर हो गया।
यही नहीं देश में अनाज की इतनी बम्पर पैदावार होने लगी कि देश अनाज का निर्यात करने की स्थिति में आ गया। आज देश में उन्नीसवीं सदी के छठे एवं सातवें दशक जैसी स्थिति फिर बन गयी है। देश में अनाज का उत्पादन लगातार घट रहा है। कृषि उत्पादन घटने का एक बड़ा कारण यह भी निकल कर आया है कि गांव के युवाओं में खेती के प्रति लगातार अरूचि बढ़ रही है।
गांव का युवा खेतों के अन्दर अपना जीवन बिताने में विश्वास नहीं रखता है। उसको शहर लुभता है। इसी के चलते रोजाना हजारों युवा गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे है।
काश्तकारी का जिम्मा गांव के बड़े बूढ़ों पर निर्भर होकर रह गया है। इसका परिणाम है गांव में आज भी पुरातन पद्धित ही चल रही है। उत्तर प्रदेश में तमाम गांव में हजारों हेक्टेयर भूमि वर्ष भर खाली पड़ी रहती है क्योंकि उस भूमि का मालिक शहरों में बस गया है। युवाओं में खेती के प्रति पनपी अरूचि का कारण स्वाभाविक है क्योंकि किसान परिवार कमरतोड़ मेहनत के बावजूद उतना उत्पादन नहीं कर पाता है जिससे उसकी बुनियादी जरूरतें पूरी हो सके। गांव का युवा यह सिलसिला वर्षो से देख रहा है।
युवा अब यह सब सहने को तैयार नहीं है। अफसोसजनक पहलू यह है कि ग्रामीण युवाओं के लिए शहरों में भी रोजी, रोटी कमाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। शहरों में रोजी रोटी के साथ रिहायशी इलाकों में दुर्गन्धमय वातावरण में रहना पड़ता है जिससे उसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर शहर का वातावरण बढ़ती ग्रामीण आबादी से प्रभावित होता है। आज युवाओं को गांव में रोकना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। हम उन कारणों से भी वाकिफ है जिसके चलते युवा गांव से पलायन करता है। इसलिए जरूरी है सरकार ऐसी योजनायें तैयार करे जिससे खेती लाभप्रद व्यावसाय में तब्दील हो जाये जिससे युवा खेती के प्रति एक बार फिर से आकृष्ट हो।
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