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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

रात बाकी... सुरूर की बात बाकी...

रात बाकी... सुरूर की बात बाकी...

राजस्थान में शराब की दुकानें भले ही 8 बजे बंद हो जाती हों लेकिन शराब का सुरूर कहीं भी कम नजर नहीं आता। अगर कोई शौकीन शराब पीना चाहे तो उसे रात 8 बजे बाद भी निराश नहीं होना पड़ता है। इसका कारण 8 बजे बाद शहर में कई स्थानों पर अंडों के ठेले शराब की दुकानों में तब्दील हो जाते हैं और फिर शुरू हो जाता है इन अस्थाई ठेकों पर मदिरा की मस्ती दौर। इन ठेलों पर चाहे शराब खरीदो या फिर वहीं बैठकर पीओ इसकी पूरी सुविधा मिलती है। कई जगहों पर तो ये गैरकानूनी काम थानों के पास स्थित ठेलों पर भी देखा जा सकता है, लेकिन पुलिसकर्मी जानबूझकर इन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाते। शराब माफिया द्वारा कानून की धज्जियां किस प्रकार उड़ाई जा रही है। राज्य में कांग्रेस की सरकार ने अपना शासन आते ही शराब की दुकानों की समय सीमा रात 11 बजे से घटाकर रात 8 बजे कर दी थी, जिसकी वजह से शराब ठेकेदारों में खलबली मच गई थी। कुछ दिनों तक ये ठेकेदार समय सीमा के बाद तक भी दुकानें खोलते हुए नजर आए लेकिन पुलिस की सख्त कार्यवाही के चलते इन्होंने 8 बजे बाद दुकान खोलने के अपने फैसले को बदलकर शराब बेचने का दूसरा तरीका इजाद कर लिया ताकि देर रात तक शराब न बेच पाने के कारण इनको आर्थिक नुक्सान न हो। 
इसी के चलते ये शराब विक्रेता अलग-अलग तरीकों से देर रात तक शराब परोसने के कार्य को अंजाम तक पहुंचा रहे हैं। समय सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर कई बार आंदोलनात्मक रूख की धमकी को लेकर भी जब इन्होंने कोई राहत महसूस नहीं की तो अंडे के ठेले लगाने वालों से सांठगांठ कर अपनी बिक्री बढ़ा रहे हैं। ठेले वालों के पास गिलास, प्याज, नमकीन, पानी, सोडा एवं कुर्सियां उपलब्ध रहती हैं। यहां तक कि कच्ची शराब के शौकीन भी यहां से निराश नहीं लौटते। रात को आठ बजे बाद ये जरूर है कि शराब के दामों में बढ़ौतरी  करके दिये जाते हैं पर शराब के शौकीनों के लिये ये बात कहीं भी मायने नहीं रखती। ये एक बोतल पर 50 रूपये ज्यादा देकर अपनी प्यास बुझाते नजर आते हें। अंडे वाले भी इतने सतर्क रहते हैं कि एक बार मांगने पर वे मना कर कह देते हैं कि यहां शराब नहीं मिलती और जब उन्हें यकीन हो जाता है कि ये वास्तव में शराब पीने का शौकीन है पुलिस का मुखबिर नहीं है तो उनको शराब दी जाती है। जो व्यक्ति  ठेलों के इस रहस्य को जानते हैं, वे बेफिक्र होकर देर रात तक शराब खरीदने आते हैं, उन्हें इस बात की बिल्कुल चिंता नहीं रहती कि रात को 8 बाद वे शराब नहीं खरीद पाएंगे। 
इनके अलावा भी शहर में कई जगहों पर अवैध शराब का कारोबार दिन-दूनी, रात-चौगनी तरक्की कर पुलिस प्रशासन की किरकरी करने में अहम भूमिका अदा कर रहा है।

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