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गुरुवार, 17 मई 2012

रोडवेज में रिक्त पदों के लिए आवेदन अब 31 मई तक जमा होंगे


रोडवेज में ड्राइवर व कंडक्टर के 718 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि दूसरी बार बढ़ाकर अब 31 मई कर दी गई है। इसके साथ ही रोडवेज प्रशासन ने नियमों में संशोधन कर जिस पद के लिए आवेदन किया जाता है, उसी का लाइसेंस होना अनिवार्य कर दिया है। 

यह संशोधन संचालक मंडल के निर्णय व राज्य सरकार की अनुमति से किया गया है। रोडवेज जोधपुर जोन के महाप्रबंधक महावीर प्रसाद दाधीच ने बताया कि सीएमडी मंजीत सिंह ने हाईकोर्ट की जयपुर पीठ द्वारा 25 अप्रैल को जारी आदेश की अनुपालना में रोडवेज में रिक्त पदों की भर्ती के लिए पूर्व में जारी आदेश में संशोधन किया है। आवेदन जोधपुर डिपो में रूम नंबर एक में जमा होंगे।

मंगलवार, 20 मार्च 2012

भारत में महंगा होगा गहना, थाइलैंड से सस्‍ते में आएगा सोना

सोना से प्रेम करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए बुरी खबर है। केंद्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद बोर्ड (सीबीईसी) ने गैर-ब्रांडेड आभूषणों पर बढ़े हुए उत्पाद शुल्क को वापस लेने से साफ मना कर दिया है। बजट में प्रणब मुखर्जी ने इन आभूषणों पर 1 फीसदी उत्पाद शुल्क लगाने की घोषणा की है। वहीं इसको लेकर देश भर में आभूषण विक्रेताओं का विरोध लगातार जारी है।

सीबीईसी अध्यक्ष एस के गोयल ने कहा कि वर्ष 2012-13 के बजट में शुल्क बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को वापस नहीं लिया जाएगा। इस बारे में जल्द ही स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा। उन्होंने बजट में 1 फीसदी उत्पाद शुल्क लगाने के प्रस्ताव को जायज ठहराते हुये कहा कि संसाधन जुटाने के लिए ऐसे कदम उठाने जरूरी हैं। बजट में किए गए प्रावधानों के मुताबिक भारत में जहां सोना महंगा हो जाएगा, वहीं थाइलैंड से सस्‍ते में आएगा।

 गौरतलब है कि बजट में बिना ब्रांड के आभूषणों पर 1 फीसदी कर लगाये जाने से लाखों सर्राफा व्यापारी परेशान है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने इस बढोतरी को वापस नहीं लिया तो इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

 गोयल ने गैर ब्रांडेड आभूषणों पर उत्पाद शुल्क की दर को मामूली बताते हुए कहा कि सब्सिडी पर खर्च हुए मदों के बिलों के भुगतान के लिए संसाधनों में बढ़ोत्तरी की सख्त जरूरत है। बजट में इस दिशा में कदमों की सख्त जरूरत थी और सरकार को सब्सिडी मदों पर हुए खर्च के बिल के भुगतान के लिए संसाधन तो जुटाने ही हैं।

 गोयल ने कहा कि आभूषण पर प्रभावी कर की दर को 90 रुपए प्रति ग्राम की श्रेणी में लाया जा सकता है। सरकार ने सोने पर भी आयात शुल्क को दोगुना करके 4 फीसदी किया है। भारत दुनिया में सोने की खपत करने वाला सबसे बडा देश है और 2011 के दौरान देश में 967 टन सोने का आयात किया गया था।

 एसोचैम की प्रत्यक्ष कर संबंधी की राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष वेद जैन ने कहा कि यूरोपीय ऋण संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर है लेकिन भुगतान संतुलन पर दबाव बना हुआ है।

स्वाईन फ्लू की आहट


सभी जिला अस्पतालों में जांच के लिए सुविधा
मौसम के बदलाव के साथ ही स्वाईन फ्लू की आहट के चलते राज्य सरकार के चिकित्सा विभाग के कान खड़े हो गए हैं। चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को रोकथाम और जांच के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में कई स्थानों से पिछले एक सप्ताह में करीब तीन स्वाईन फ्लू के मामले सामने आ चुके हैं।
सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि प्रदेश में स्वाईन फ्लू पर नियंत्रण, रोकथाम एवं उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों से संबद्घ चिकित्सालयों एवं सभी 33 जिला अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच हेतु संग्रहण केन्द्रों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेजों में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध है एवं एक हजार 500 रुपये की दर पर जांच करवाई जा सकती है।
दूसरी तरफ निदेशक जन स्वास्थ्य डॉ. बी.आर.मीणा ने बताया कि प्रदेश के 6 मेडिकल कॉलेजों-एस.एम.एस. मेडिकल कॉलेज जयपुर, आर.एन.टी. मेडिकल कॉलेज उदयपुर, एस.पी. र्मेिडकल कॉलेज बीकानेर, एमबीएम मेडिकल कॉलेज कोटा, जे.एल.एन मेडिकल कॉलेज अजमेर एवं एस.एन. मेडिकल कॉलेज जोधपुर में स्वाइन फ्लू की जांच सुविधाएं उपलब्ध हंै।
डॉ. मीणा ने बताया कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बीपीएल कार्डधारी परिवारों, नि:शक्तजन, विधवाओं, वरिष्ठ नागरिकों को स्वाइन फ्लू की जांच सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध करवायी जा रही हंै। उन्होंने बताया कि सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी एवं इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण पाये जाने पर स्वाइन फ्लू की जांच करवाने की सलाह दी जाती है। इस रोग के उपचार के लिए सभी तरह की दवाइयां राजकीय चिकित्सालयों में नि:शुल्क उपलब्ध करवायी जा रही हंै।



टोल फ्री 104 भी
चिकित्सकीय परामर्श, सूचना निर्देशिका सेवा, शिकायत पंजीकरण एवं प्राथमिक तौर पर चिकित्सकीय सलाह एवं दवा लेने हेतु सुझाव के लिए प्रारम्भ की गयी टोल फ्री 104 सेवाओं पर स्वाइन फ्लू की जानकारी भी उपलब्ध है। टोल फ्री 104 से स्वाइन फ्लू के लक्षण, जांच एवं उपचार के विषय में आवश्यक जानकारी ली जा सकती है।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य बी.एन.शर्मा ने बताया कि राजकीय स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत भी टोल फ्री नम्बर 104 पर दर्ज करवायी जा सकती है। प्राथमिक उपचार के लिए सलाह, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी सूचना, वैकल्पिक उपचार के बारे में सूचना, पोषण एवं संरचना संबंधी सूचना के साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के विषय में भी टोल फ्री नम्बर 104 पर सूचना प्राप्त की जा सकती है।
टोल फ्री नम्बर 104 पर फोन कर चिकित्सकीय सूचना, सलाह एवं परामर्श नि:शुल्क प्राप्त किया जा सकता है। यह परामर्श राजस्थानी, हिन्दी अथवा अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है।

प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद एक अप्रेल से

राज्य में 1 अप्रेल 2012 से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद शुरू की जाएगी।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री परसादी लाल मीणा की अध्यक्षता में शासन सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि राज्य में गेहूं के बम्पर उत्पादन को देखाते हुए किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रदेश में 1 अप्रेल, 2012 से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद आरंभ की जाए। इस वर्ष राज्य में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खारीद के लिए 15 लाख मैट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मीणा ने बैठक में खरीद से संबंधित सभी तैयारियां पूर्व में ही सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि जिन जिलों में गेहूं की अधिक आवक हुई है, वहां खरीद केन्द्रों की संख्या को बढ़ाया जाए और जिला मुख्यालयों पर अनिवार्य तौर पर एक खरीद केन्द्र शुरु किया जाए। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि गत वर्षों में जिन खरीद केन्द्रों पर गेहूं की शून्य खरीद हुई है, वहां खरीद केन्द्रों को बंद करने पर विचार किया जाए।
खाद्य मंत्री ने बैठक में निर्देश दिए कि किसानों की सुविधा के लिए प्रत्येक मण्डी में खरीद केन्द्र आरंभ किया जाए और जिन स्थानों से खरीद केन्द्र आरंभ करने के संबंध में मांग आए, वहां खरीद केन्द्र शुरू करने पर तत्परता से विचार किया जाए। उन्होंने किसानों को राशि का भुगतान शीघ्र और चैक के माध्यम से करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में खाद्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव जे.सी.महान्ति ने बताया कि इस वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद का कार्य पांच एजेन्सियों द्वारा किया जाएगा। इनमें भारतीय खाद्य निगम, राजफैड, नेफेड, राजस्थान राज्य भण्डार व्यवस्था निगम तथा तिलम संघ शामिल हैं। बैठक में खाद्य, सहकारिता, राजफैड, एफसीआई, नेफेड और तिलम संघ के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सोमवार, 19 मार्च 2012

सिंघवी-बुढ़ानिया कांग्रेस प्रत्याशी

राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों में बदलाव को लेकर एकराय नहीं बन पाने पर कांग्रेस ने वर्तमान दोनों सांसदों अभिषेक मनु सिंघवी और नरेन्द्र बुढ़ानिया को ही दुबारा मौका दिया है। आज दिल्ली में दोनों के नामों की घोषणा कर दी गई। भाजपा एक सीट के लिए भूपेन्द्र यादव को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। 
राज्य में तीन सीटों के लिए 30 मार्च को चुनाव होगा। कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा के बाद दिल्ली में केन्द्रीय नेताओं से चर्चा करने गए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान ने राज्य प्रभारी मुकुल वासनिक के साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। इसके बाद वे आज सुबह वापस लौट आए। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस में राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य मोहनप्रकाश को इस बार राज्य से राज्यसभा टिकट दिए जाने की संभावना तलाशी जा रही थी लेकिन केन्द्रीय और प्रदेश नेतृत्व इस बात से चिन्तित दिखाई दिया कि नरेन्द्र बुढ़ानिया का टिकट काटे जाने की स्थिति में पार्टी के परम्परागत जाट वोट बैंक में नाराजगी बढ़ सकती है। जाट नेता महिपाल मदेरणा के खिलाफ कार्रवाई होने के बाद से ही कांग्रेस से नाराज चल रहे हैं। अभिषेक मनु सिंघवी के नाम पर आलाकमान पहले ही मानस बना चुका था। केवल एक सीट पर बदलाव के लिए विचार किया जा रहा था। इस बदलाव में केन्द्रीय नेतृत्व के नजदीक होने के कारण मोहनप्रकाश की दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी लेकिन आलाकमान ने किसी भी तरह का खतरा उठाने के बजाय दोनों सांसदों के नाम पर ही मुहर लगा कर विरोध की संभावनाओं को समाप्त कर दिया। भूपेन्द्र यादव कल जयपुर आएंगे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं राज्यसभा के लिए प्रत्याशी भूपेन्द्र यादव कल जयपुर आएंगे। यादव ने बताया कि जयपुर पहुंचकर वे पार्टी के प्रमुख नेताओं से मुलाकात करेंगे। साथ ही, आगे की योजना पार्टी तय करेगी। प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि यादव के जयपुर पहुंचने के बाद ही आगे कार्यक्रम तय किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि कल शाम नई दिल्ली में आयोजित पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में राजस्थान से राज्यसभा सांसद के लिए भाजपा ने भूपेन्द्र यादव को प्रत्याशी घोषित किया था।

हैकरों के निशाने पर पोर्न साइटें

इन दिनों इंटरनेट हैकरों का निशाना बन रही पोर्न साइटें। हैकरों ने पोर्न साइटों से 73 हजार से ज्यादा उपभोक्ताओं के विवरण चुराने का दावा किया है।


पोर्न साइटों से हैकरों ने जो विवरण चुराया है उसमें यूजर नेम, ईमेल का पता और पासवर्ड भी शामिल हैं। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी हैकरों ने झटका दिया है। हैकरों ने करीब 40 हजार क्रेडिट कार्ड नंबर, क्रेडिट कार्ड की अवधि समाप्त होने की तारीख और सिक्यूरिटी कोड भी चुरा लिए हैं।

हैकर ग्रुप द कन्सॉर्शियम ने चुराए गए कुछ आँकडों को जारी भी किया है और कहा है कि इस वेबसाइट की सुरक्षा में भारी कमियाँ थी और इस कारण वे इसे चुराने से अपने को नहीं रोक पाए।

भारत में 25 लाख समलैंगिक, 7% एचआईवी

सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि भारत में समलैंगिकों की जनसंख्या अनुमानत: 25 लाख है और उनमें से करीब सात प्रतिशत (1.75 लाख) एचआईवी संक्रमित हैं
सरकार ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के आंकड़ों के हवाले से उच्चतम न्यायालय में दायर अपने हलफनामे में कहा कि पुरुषों से सेक्स करने वाले पुरुषों की संख्या भारत में अनुमानत: 25 लाख है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि वह पुरुषों से सेक्स संबंध रखने वाले ऐसे चार लाख पुरुषों को अपने एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लाने की योजना बना रही है, जो अधिक खतरे वाले हैं। उसने इसके तहत दो लाख ऐसे लोगों को शामिल भी कर लिया है।

मंगलवार, 13 मार्च 2012

धूप से बचाए, स्टाइलिश बनाए : फैशनेबल टोपी

घर से बाहर निकलते ही चिलचिलाती धूप जब आपके सर पर पड़ती है तो आपका सर बेचारा इस अटैक से घबराकर रह जाता है। जाहिर है कि तीखी धूप से झुलसने के अलावा उसे पसीने में चिपचिपाते बालों की समस्या और फिर इन दोनों से जुड़ी अन्य कई परेशानियों को भी झेलना पड़ता है। तो क्यों न सर को दें थोड़ा आराम टोपी पहनाकर।

सर को ढंककर रखना हॉट मौसम की सबसे प्राथमिक जरूरत है। धूप आपके सर के बालों से लेकर त्वचा तक के लिए हानिकारक होती है। फिर इसके दुष्प्रभाव सर के रास्ते आपके शरीर के अंदर भी जा पहुंचते हैं। चूंकि हैट आपके सर को धूप से बचाता है और हवा के आने-जाने के लिए भी रास्ते खुले रखता है अतः गर्मियों में यह सर को बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। यूं हैट का यह चलन पश्चिम की देन है लेकिन अब फैशन तथा जरूरत दोनों के लिहाज से यह पूरी दुनिया में मुकाम बना रहा है। गर्मी में जूट, कॉटन या डेनिम से बने हैट न केवल आपके सर को बचाए रखते हैं बल्कि दिखने में भी ये काफी खूबसूरत लगते हैं। इनका फैशन सदाबहार है। कॉलेज जाने वाली युवतियों से लेकर महिलाओं तक पर ये फबते हैं।
ये कई सारी खूबसूरत डिजाइनों, रंगों और आकारों में मिलते हैं। गर्मियों में तो अक्सर आपको बाजार इनसे सजे मिल जाएंगे। चाहें तो जूट का बना गोल हैट पहनें या फिर काऊब्वॉय हैट, आप चाहें तो सिंपल डेनिम हैट से भी सज सकती हैं। इसकी कीमत भी 100 रुपए से शुरू होती है। हां, यदि आप ब्रांडेड हैट्स पहनने का शौक फरमाएं तो आपको हजारों रुपए भी खर्च करने पड़ सकते हैं। ये आप पर निर्भर है।

आजकल हैट्स के मटेरियल के अलावा उसकी डिजाइन के साथ भी कई प्रयोग किए जाते हैं। इसमें मोतियों से लेकर पंछियों के पंख, जवाहरात, रेशमी कपड़े आदि जैसी अनगिनत चीजों का प्रयोग किया जाने लगा है जिससे हैट अब एक क्रिएटिव फैशन एक्सेसरी भी बन गए हैं।

हैट हर पोशाक के साथ फबता है और विशेषतौर पर वेस्टर्न वेयर के साथ ये बहुत ही अच्छा कॉम्बिनेशन बनाता है। जींस-टी शर्ट, स्कर्ट, मिडी, कैप्री या फिर जंप सूट, सभी के साथ हैट अच्छा लगेगा। यही नहीं, सलवार सूट या साड़ी के साथ भी आप स्टाइलिश लग सकती हैं।

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

'बेबी कुन्द्रा' रखेगा शिल्पा को आईपीएल मैचों से दूर

अपने ठुमकों से लोगों का दिल लूटने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी जब से आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स की ब्रांड एम्बेसडर बनीं हैं तब से ही यह इंडियन प्रीमियर लीग की श्रेष्ठ टीम बन गई है।
इसके साथ ही खास बात यह है कि शिल्पा ने भी इस टीम का कोई मैच देखना नहीं छोड़ा है। लेकिन लगता है कि इस बार शिल्पा को अपनी प्रेगनेंसी के कारण इस रोमांच से दूर रहना होगा।

सूत्रों ने बताया कि शिल्पा को डॉक्टरों ने आराम करने की सलाह दी है। उन्हें कहीं भी आने-जाने से मना किया गया और इसलिए वे आईपीएल मैचों से दूर रहेंगी।

इतना ही नहीं वे अपने पति राज कुन्द्रा की सुपर फाइट लीग में भी कोई योगदान नहीं कर पाएंगी क्योंकि राज उन्हें किसी भी तरह के स्ट्रेस व तनाव से दूर रखना चाहते हैं।

सूत्रों के अनुसार शिल्पा मई माह में बच्चे को जन्म दे सकतीं हैं और इस दौरान ही आइपीएल के मैच होने वाले हैं। इसलिए वे इनका मजा नहीं ले पाएंगी।
 
कोई बात नहीं शिल्पा, आपके इस मनोरंजन को आपके गोद में खेलने वाला बच्चा दूर कर देगा।

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

विटामिन डी की कमी से होने वाली बीमारियां

सूर्य की रोशनी से मिलने वाले इस विटामिन की सबसे ज्यादा कमी महिलाओं में है जो लोग कम शारीरिक श्रम करते हैं वे भी इसकी कमी के अधिक शिकार है।
एक नए शोध में पाया गया है कि आस्ट्रेलिया में रहने वाले तीन में से एक व्यक्ति के शरीर में विटामिन डी की कमी है जिससे कई रोगो के जन्म लेने का खतरा है। ‘क्लीनिकल एंडोक्रिनोलोजी’ जर्नल में छपे इस शोध में 11000 लोगों से आंकड़े जुटाये गए हैं। इसमें पाया गया है कि सूर्य की रोशनी से मिलने वाले इस विटामिन की सबसे ज्यादा कमी महिलाओं में है।
साथ ही वे लोग जो कम शारीरिक श्रम करते हैं वे भी इसकी कमी के अधिक शिकार है। दीकन यूनिवर्सिटी के राबिन डैली ने बताया कि आस्ट्रेलिया में विटामिन डी कमी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। यह समस्या पूरे विश्व में भी होने जा रही है। सूर्य के प्रकाश में इसकी उपलब्धता के बावजूद आस्ट्र्रेलिया के लोग इसके शिकार हैं। उन्होंने बताया, ‘विटामिन डी की कमी से कई गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं। हड्डियों की कमजोरी, हृदय संबंधी रोग, ओस्टोपोरेसिस, मांसपेशियों में कमजोरी, कैंसर और टाइप टू का मधुमेह जैसी बीमारियां पनप सकती हैं। इसकी कमी जगह और मौसम पर भी निर्भर करती पाई गई है। सर्दियों में इसका स्तर और भी कम हो जाता है और आस्ट्रलिया के दक्षिणी हिस्सों में रहने वालों में इसकी ज्यादा कमी पाई गई।

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

घर में नहीं रखना चाहिए ऐसी बंद या खराब चीज, क्योंकि...

कई बार हम पूरी मेहनत के बाद भी असफल हो जाते हैं। कुछ लोगों के घर-परिवार में सब कुछ अच्छा होते हुए भी सुख नहीं मिल पाता ऐसे में संभवत: उस घर में कोई दोष हो सकता है। इस दोष की वजह से ही परिवार को खुशियां प्राप्त नहीं हो पाती है।

कुछ सामान्य सी ऐसी बातें हैं जिन पर ध्यान नहीं दिया जाता लेकिन इनके दुष्परिणाम काफी अधिक रहते हैं। घर में रखी हर वस्तु का प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। यदि कोई वस्तु नकारात्मक विचार को अधिक बल प्रदान करने वाली होती है तो उसकी वजह से कार्यों में असफलता मिलती है। इसी वजह से ऐसी वस्तुओं को घर से दूर ही रखना चाहिए।

घर में नेगेटिव ऊर्जा को सक्रिय करने वाली चीजों में बंद ताला भी शामिल है। जिस घर में कोई खराब बंद ताला होता है वहां पॉजीटिव विचारों में कमी आती है। परिवार के सदस्यों को नकारात्मकता का सामना करना पड़ता है। किसी भी कार्य में पहले असफलता ही नजर आती है। आत्मविश्वास की कमी हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि बंद ताले से व्यक्ति की किस्मत के दरवाजे भी बंद हो जाते हैं। अत: यदि आपके घर में कोई खराब बंद ताला हो तो उसे तुरंत ही हटा दें। अन्यथा बुरे परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

आखिर कौन है राहूल गांधी पर जूता फैंकने वाला

उत्तराखंड के देहरादून में राहुल गांधी के मंच पर जूता फेंकने वाले व्यक्ति को भले ही बीजेपी व बाबा रामदेव का समर्थक बताया जा रहा है लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयां करती है।
पड़ताल में पता चला है कि इस घटना को अंजाम देने वाले 30 वर्षीय व्यक्ति का नाम कुलदीप सिंह है और उसकी दिमागी हालत कुछ कमज़ोर है।
कुलदीप सिंह पौंटा साहिब मे पिता के साथ बिस्किट बनाने की छोटी सी फ़ैक्टरी मे काम करता है। वह 2010 में एक महिला के साथ बलात्कार के मामले मे जेल जा चुका है और अभी भी उसपर मुक़दमा चल रहा है।
सोमवार को जब राहुल भ्रष्टाचार के मामले पर भाषण दे रहे थे, तभी इसने यह कह्कर जूता फेंक दिया कि सुरेश कल्माड़ी को तो ज़मानत पर छोड दिया और यहां भ्रष्टाचार की बात करते हैं।
यह भी पता चला है कि कुलदीप सिंह एक स्थानीय कांग्रेसी विधायक का क़रीबी है।

बुधवार, 18 जनवरी 2012

कम्प्यूटर में वायरस कैसे?

वायरस कम्प्यूटर का दुश्मन है। कम्प्यूटर को वायरस से बचाने का प्रयास करना अति आवश्यक है। कम्प्यूटर में वायरस कैसे आता है? कम्प्यूटर में वायरस मुख्यतः दूषित एवं भ्रष्ट फ्लॉपियों के प्रयोग से होता है। वायरस कम्प्यूटर में घुस कर मौका पाते ही सिस्टम में उपस्थित जानकारी को  ज्यादा से ज्यादा फ्लापियों में नुकसान पहुंचाता है। वायरस एक प्रोग्राम होता है जो कम्प्यूटर प्रोग्रामरों द्वारा बनाया जाता है। यह प्रोग्राम जब किसी फ्लॉपी में होता है। और उस फ्लॉपी को कम्प्यूटर की ड्राइव में लगाकर शुरू करते हैं तो यह प्रोग्राम कम्प्यूटर की मेमोरी नष्ट या भ्रमित कर देता है। यानि कम्प्यूटर में वायरस किसी ऐसी फ्लॉपी को चलाने से आता है जिसमें पहले से ही वायरस का प्रोग्राम हो। वायरस दूषित प्रोग्रामों को चलाने से या कम्प्यूटर नेटवर्क पर दूषित प्रोग्रामों की भागीदारी से भी आता है। इसे वायरस नष्ट करने वाले प्रोग्राम से हटाना होता है या पूरी फ्लॉपी अथवा डिस्क को फारमेट करना पड़ता है। 

‘क्रेडिट कार्ड’ कैसे शुरू हुआ?

आजकल क्रेडिट कार्ड का चलन  काफी है। क्रेडिट कार्ड का महत्व निरन्तर बढ़ता जा रहा है। क्रेडिट कार्ड की शुरुआत का श्रेय मूलतः अमेरिका को है। अमेरिका से शुरू हुआ क्रेडिट कार्ड का चलन आज सभी को लाभदायी साबित हो रहा है। पचासों वर्ष पहले अमेरिका के उद्योगपति ‘फ्रैंक मैक्नमरा’ एक होटल में गए, वहां खाना खाने के बाद बिल का भुगतान जब करने लगे तो पाया कि जेब में पैसा ही नहीं है, वह अपना पर्स घर पर ही भूल आये थे। घर से पैसा मंगा कर भुगतान किया और उसी समय से उनका दिमाग चलने लगा कि कौन सा ऐसा उपाय किया जाए कि यदि पास पैसा न हो तो भुगतान का उचित और सम्मानित उपाय बन जाय। अंततः उन्होंने सन् 1950 में डायनर्स क्लब द्वारा सबसे पहले क्रेडिट कार्ड शुरू किया उसके बाद व्यापारिक संस्थाओं ओर बैंकों ने इस चलन को लागू किया। 

‘एलर्जी’ किसे कहते हैं?

कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं कि उनका उपचार कराने के लिए जैसे ही किसी चिकित्सक के पास पहुंचे तो पता चलता है कि एलर्जीं हो गयी है। गर्मियों के दिनों में एलर्जी हो जाना आम बात है। एलर्जी किसी एक चीज से नहीं कई प्रभावों से होती हेै। एलर्जी क्या है? -रोगाणुओं से रक्षा करने की शरीर में एक विशेष रक्षा प्रणाली होती हैं। यह प्रणाली ही तमाम तरह के रोगों और संक्रामक जीवाणुओं के साथ ही हानिकारक पदार्थों के द्वारा शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हे। जब जिस जगह पर इस कणिकाओं का प्रकोप ज्यादा हो जाता है और उसका  कुप्रभाव रोग के रूप में जो सामने आता हेै  उसे ‘एलर्जी’ कहते हैं। 

सोमवार, 16 जनवरी 2012

अपनी जगह खुद बनाई राजपाल यादव ने



राजपाल यादव ने अपनी बहुमुखी अभिनय प्रतिभा के बल पर हिंदी फिल्मों में जगह बनाई है। बॉलीवुड में बिना किसी गॉडफादर के अपने बलबूते मुकाम हासिल करने वाले लोगों में हैं राजपाल यादव। उन्होंने विभिन्न फिल्मों में अपनी भूमिकाओं से लोगों का भरपूर मनोरंजन किया है। आज षायद ही कोई ऐसी बड़ी फिल्म बनती हो जिसमें राजपाल यादव की भूमिका नहीं होती हो। निर्देषकों को पता है कि यदि फिल्म में कामेडियन रखना है तो आज के समय राजपाल से बेहतर कोई नहीं है। यह राजपाल की बढ़ती लोकप्रियता ही तो है कि उन्हें अपने छोटे से कॅरियर में ही मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्में भी मिलीं।

26 नवंबर 1970 को उत्तर प्रदेष के षाहजहांपुर में जन्मे राजपाल षुरू से ही अभिनय के क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहते थे। इसके लिए षुरू में वह अपने इलाके में ही मौजूद थियेटर से जुड़े और वहां कई नाटकों में काम किया। बाद में वह आगे के प्रषिक्षण के लिए लखनउ चले गये और वहां भारतेंदु नाट्य अकादमी में दाखिला ले लिया। यहां दो साल का कोर्स पूरा करने के बाद वह दिल्ली चले गये और वहां राश्ट्रीय नाट्य विद्यालय में दाखिला लिया। 1996 में राजपाल मुंबई गये और वहां फिल्मों में काम हासिल करने के लिए मषक्कत षुरू की। कोई गॉडफादर या फिर संपर्क नहीं होने के कारण उन्हें काम हासिल करने के लिए काफी चक्कर लगाने पड़े। आखिरकार दूरदर्षन ने उन्हें षरण दी और 'नौरंगीलाल के हसीन सपने नामक सीरियल में वह मुख्य किरदार निभाने लगे। यह सीरियल मषहूर सीरियल 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने का सीक्वेल था। 

राजपाल पर जल्द ही राम गोपाल वर्मा की निगाह पड़ी जिन्होंने राजपाल को अपनी फिल्म 'मस्त में एक छोटा रोल दिया। इस रोल में राजपाल जमे तो वर्मा ने उन्हें अगली फिल्म 'जंगल में बड़ा रोल दिया। जल्द ही राजपाल पर अन्य निर्देषकों की भी नजर पड़ी और राजपाल को काम मिलना षुरू हो गया। राजपाल ने अपनी कामेडी से दर्षकों को मोहना षुरू किया तो वह हर फिल्म की जरूरत सी बनते चले गये और जल्द ही उनके पास ढेरों फिल्मों की लाइन लग गयी। उनकी भूमिकाओं को जिन फिल्मों में प्रमुख रूप से पसंद किया गया उनमें हंगामा, वक्त, चुप चुप के, गरम मसाला, फिर हेराफेरी और ढोल प्रमुख हैं। राजपाल को मुख्य अभिनेता का रूप में भी काम करने का मौका मिला और वह 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं, 'मेरी पत्नी और वो और 'हैलो हम लल्लन बोल रहे हैं में राजपाल बतौर मुख्य अभिनेता नजर आए। किसी कामेडियन को ऐसा मौका षायद ही मिलता हो। 

राजपाल की अभी तक प्रदर्षित फिल्मों में दिल क्या करे, मस्त, जंगल, प्यार तूने क्या किया, चांदनी बार, ये जिंदगी का सफर, कोई मेरे दिल से पूछे, तुमको न भूल पाएंगे, कंपनी, लाल सलाम, तुमसे अच्छा कौन है, हम किसी से कम नहीं, मैंने दिल तुझको दिया, चोर मचाए षोर, रोड़, मसीहा, एक और एक ग्यारह, द हीरो, हासिल, डरना मना है, हंगामा, मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं, कल हो न हो, दिल बेचारा प्यार का मारा, लव इन नेपाल, इंसाफ, आन, गर्व, मुझसे षादी करोगी, टार्जन, षर्त, वास्तुषास्त्र, वक्त, क्या कूल हैं हम, नेताजी सुभाश चंद्र बोस, मैंने प्यार क्यों किया, मैं, मेरी पत्नी और वो, गरम मसाला, षादी नंबर वन, टोम डिक एण्ड हैरी, अपना सपना मनी मनी, लव इन जापान, मालामाल वीकली, षादी से पहले, डरना जरूरी है, फिर हेराफेरी, चुप चुप के, लेडीज टेलर, भागमभाग, पार्टनर, राम गोपाल वर्मा की आग, ढोल, भूल भुलैया, भूतनाथ, मेरे बाप पहले आप, गॉड तुसी ग्रेट हो, डैडी कूल, एक से बुरे दो, डू नाट डिस्टर्ब, दे दनादन, मिर्च, रन, खट्टा मीठा, हैलो हम लल्लन बोल रहे हैं और एक्षर रिप्ले प्रमुख हैं।

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

विमान हादसों की वजह बताता है ब्लैक बॉक्स

ब्लैक बॉक्स से न केवल विमान की दुर्घटना के कारणों का पता चलता है बल्कि दुर्घटना के पहले काकपिट और विमान कंट्रोल कक्ष के बीच हुई बातचीत का भी पता चलता है। किसी विमान हादसे की वजह क्या थी, इन घटनाओं में किसका हाथ था और किस कारण से विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ इसका पुख्ता पता लगाने का एकमात्र जरिया ब्लैक बाक्स होता है।
ब्लैक बॉक्स विमान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले पिछले भाग में लगा होता है। भीशण से भीशण दुर्घटना में भी यह नश्ट नहीं होता। इसकी मजबूती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह 1100 डिग्री सैंटीग्रेट तापमान में और 500 पौंड के कठोर स्टील को इस पर 10 फुट से गिराने पर भी क्षतिग्रस्त नहीं होता है। ब्लैक बॉक्स बनाने से पहले इसकी मजबूती के कई परीक्षण किए जाते हैं। जिनमें इसको बहुत भारी गुरुत्व बल, 500 पौंड का वायुदाब प्रहार और 24 घंटे तक समुद्री जल में दबाव में रखा जाता है।
ब्लैक बॉक्स दो रंगों का होता है। इस बॉक्स में दो बक्से होते हैं। काकपिट वायस डाटा रिर्काडर काले रंग का होता है जबकि फ्लाइट डाटा रिकार्डर गहरा लाल या नारंगी रंग का होता है। इसका नाम ब्लैक बॉक्स इसलिए रखा गया है कि काकपिट वायस डाटा रिकार्डर के अंदर फ्लाइट डाटा रिकार्डर होता है और इस प्रकार बाहर से यह काला ही दिखाई देता है। ब्लैक बॉक्स को खोलकर अंदर से फ्लाइट डाटा रिकार्डर निकाला जाता है। जिसमें दुर्घटना के वक्त और उससे पहले की सारी जानकारियां रिकॉर्ड होती हैं।
विमान की पूंछ में लगे ये उपकरण सीधे ही कॉकपिट में लगे माइक्रोफोन से जुड़े होते हैं। इन बॉक्सों में ध्वनि प्रसारक यंत्र भी लगे होते हैं और ये एक विषेश प्रकार की बैटरी से जुड़े होते हैं। यह बैटरी सुसुप्त बनी रहती है और दुर्घटना होने की स्थिति में अपने ही चालू हो जाती है। यह बैटरी एक विषेश प्रकार की आवाज करती है और एक बार चालू हो जाने पर इसमें 90 दिन तक चलने की क्षमता होती है।

ब्लैक बॉक्स में मौजूद फ्लाइट डाटा रिकार्डर यानी एफडीआर विमान की उड़ान संबंधी जानकारियां, विमान की गति, समय, गुरुत्व बल, विमान के ऊपर नीचे होने की स्थिति, गति और दूसरी जरूरी जानकारियां इसमें लगी धातु की पतली पट्टी पर ज्यों का त्यों रिकार्ड होती हैं जिससे दुर्घटना का कारण और समय का पता लगाया जाता है। आधुनिक विमानों में फ्लाइट डाटा रिकार्डर उपयोग में लाए जाते हैं। इसमें चुम्बकीय टेप का उपयोग किया जाता है। जिसे साधारणतः 200 उड़ानों के बाद बदला जाता है और इस प्रकार बार-बार फ्लाइट डाटा रिर्काडर को बदलने की आवष्यकता नहीं रहती है। डीएफडीआर के द्वारा विमान और उसके रिकॉर्डर को बदलने की आवष्यकता नहीं रहती है। डीएफडीआर के द्वारा विमान और उसके इंजनों से संबंधित 50 से अधिक जानकारियां जैसे कि इंजनों की षक्ति, गति और दबाव, यात्री कक्ष का तापमान, रेडियो संपर्क का समय, अवतरण आदि जानकारियां प्राप्त की जाती हैं। इस प्रकार डीएफडीआर दुर्घटना की अधिक जानकारी देता है।

कॉकपिट वायस रिकॉर्डर यानी सीवीआर के द्वारा विमान के चालक कक्ष काकपिट में हुई बातचीत और रेडियो पर की गई बातचीत, चालक कक्ष में बजने वाली घंटी, विमान के इंजनों का षोर आदि रिकार्ड किए जाते हैं। इस प्रकार सीवीआर में घरेलू टेपरिकार्डर की तरह सभी बातें एक सुदृढ़ ढांचे में सुरक्षित रूप से स्वतः रिकार्ड हो जाती हैं। यह रिकार्डिंग विमान के इंजन बंद होने के साथ ही बंद हो जाती है।

इस प्रकार ब्लैक बॉक्स से न केवल दुर्घटना के कारणों का पता चलता है बल्कि दुर्घटना के पूर्व काकपिट और विमान में हुई घटनाओं का भी पता चल जाता है।

बुधवार, 11 जनवरी 2012

विश्व का सबसे छोटा चरखा अजमेर में


हिन्दुस्तान की आजादी में अंग्रेजों से लोहा लेने वाली खादी संस्कृति के लिए विख्यात गांधीजी का चरखा क्या इतना छोटा भी बनाया जा सकता है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते ? जी हां, ये सच  है विश्व का सबसे छोटा चरखा अजमेर में है। जिसने लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करा रखा है। 

स्थानीय रामगंज निवासी  मधुकान्त वत्स ने राष्ट्रपिता महात्मा  गांधी के जीवन से प्रेरणा ले उस कल्पना को साकार किया जिसकी वजह से विश्व में क्रान्ति पैदा हुई और परिवर्तन हुआ। और वह है शक्तिशाली चरखा। इस बात से प्रेरित हो वत्स ने उस बड़े चरखे का हुबहु छोटा रुप तैयार कर रेकार्ड कायम किया। विश्व के इस  सबसे छोटे चरखे की खास बात यह है कि वह कुल 13 ग्राम वजन का है  तथा लम्बाई में पांच रुपये के नोट तथा चौड़ाई में उससे भी छोटा है। चरखे की लम्बाई 11.9 से.मी., ऊंचाई 5.2 से.मी. तथा चौड़ाई 6.3 से.मी. है। 
बरबस अपनी ओर आकर्षित करता यह चरखा लकड़ी, बुश, स्पेण्डल तथा हैण्डिल के जरिये हाथों से तैयार किया गया है। हस्तनिर्मित इस चरखे के निर्माण में 6 से 7 माह की दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत और काम के प्रति लगन है। इस चरखे पर विधिवत् कपास के जरिये सूत काता जा सकता है। वत्स ने हमारे प्रतिनिधि के सामने सूत कात कर दिखाया। वत्स की पीड़ा है कि सरकार की ओर से कभी कोई प्रोत्साहन नहीं मिला। 

छोटा किन्तु शक्तिशाली प्रेरणा का द्योतक यह छोटा 'चरखा अब गिनिज बुक ऑफ वल्र्ड रेकार्ड के लिए भेजा जायेगा। श्री वत्स के पास लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रेकार्ड के  एडिटर विजय घोष का हस्ताक्षरयुक्त प्रमाण पत्र मौजूद है।

गांधी जी को था लगाव


चरखा भारतीय ग्रामीण परिवेश की रीढ़ माना जाता था। यही कारण रहा कि महात्मा गांधी जी को चरखा व खादी से विशेष लगाव था। वे इसी चरखे के दम पर  भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना चाहते थे। इसी कारण गांधी जी ने अपने आंदोलनों में चरखे की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा सभी को चरखे से बने कपड़े का उपयोग करने की सलाह दी। लोगों ने इस सलाह को बखूबी माना।

खुशनुमा जिन्दगी के लिए बेहद जरूरी है पिकनिक जैसा आयोजन


पिकनिक सिर्फ मौज मस्ती और घर से बाहर खानपान का लुत्फ उठाने का ही मौका नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा के तनावों से मुक्ति दिलाने में भी सहायक है। मनोविज्ञानियों ओर समाजशास्त्रियों की नजर में रोजमर्रा की जीवनशैली से जब मन ऊब जाए या किसी बात को लेकर तनाव से परेशानी हो तो ऐसे में फिर से तरोताजा होने के लिए पिकनिक से बढ़कर कोई दूसरी चीज नहीं हो सकती। शायद इसी के मद्देनजर अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस मनाने की शुरुआत हुई। अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस 'फूड हॉलीडे के रूप में मनाया जाता है। हालांकि इस दिन आधिकारिक अवकाश नहीं होता। यह दिवस अब अमेरिकी सीमाओं को लांघ अन्य देशों में भी पहुंच गया है।

इसके लिए लोग घर या बाजार का बना खाना अपने साथ ले जाते हैं और हंसी ठिठोली के बीच सामूहिक रूप से एक साथ बैठकर इसका लुत्फ उठाते हैं। मनोविज्ञानी एसपी सिंह का कहना है कि मन को तरोताजा रखने के लिए पिकनिक जैसे आयोजन बेहद जरूरी हैं। रोजमर्रा की दिनचर्या से मन ऊब जाता है और उसे स्फूर्तिवान बनाए रखने के लिए एक निश्चित अंतराल पर परिवार के सदस्यों या सहकर्मियों के साथ सामूहिक रूप से घर या कार्यालय से बाहर कोई न कोई आयोजन होता रहना चाहिए। सिंह ने कहा कि पिकनिक बड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी काफी लाभदायक साबित हो सकती है और इसीलिए स्कूलों में बच्चों को भ्रमण पर ले जाने जैसे कार्यक्रम रखे जाते हैं। 

उन्होंने कहा कि पिकनिक से सामूहिकता की भावना उत्पन्न होती है और यह अंतर्मुखी स्वभाव वाले व्यक्तियों में अन्य लोगों के साथ घुलने मिलने का गुण पैदा कर सकती है। पिकनिक जिन्दगी के तनावों को दूर करने में भी मदद करती है और इससे मन में नए अहसास का संचार होता है।

सिंह के अनुसार पिकनिक पर जाने से बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इसमें एक ओर जहां उन्हें घर से बाहर की दुनिया का नजारा देखने को मिलता है, वहीं उनमें अन्य साथियों के साथ बेहतर तालमेल और सहयोग की भावना उत्पन्न होती है। समाजशास्त्री स्वर्ण सहगल के अनुसार पिकनिक कोई नया या आधुनिक आयोजन नहीं है, बल्कि किसी न किसी रूप में इसका आयोजन प्राचीन काल से ही होता रहा है। उन्होंने कहा कि पिकनिक भी सामाजीकरण का एक साधन है। इससे व्य1ित के मन में सामाजिकता का अहसास मजबूत होता है और उसे अपने में ही जीते रहने के अंतर्मुखी स्वाभाव से बाहर निकलने में मदद मिलती है। 

मंगलवार, 10 जनवरी 2012

फैशन की दौड़ में बच्चों की एन्ट्री

दुनिया की सभी सभ्यताओं में फैशन एक अनिवार्य अंग के रूप में शामिल रहा है। पूर्व सभ्यताओं में जहां केवल महिला व पुरूषों को फैशन करते देखा जाता था, वहीं इस आधुनिक युग में बच्चें भी फैशन की दौड़ में शामिल हो गए है। बच्चों में बढ़ता फैशन का क्रेज आजकल हर जगह देखने को मिलता है। बच्चे भी स्वयं को कैसे फैशन के अनुसार ढालना चाहते हैं। इसे देखकर कभी-कभी फैशनेबल माता-पिता भी हैरत में पड़ जाते हैं। घर, स्कूल या पार्टी हो सभी जगह बच्चे जमाने की चाल में चलना पसंद करते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। मां-बाप भी फैशन के प्रति जागरूक होते जा रहे हैं जो बच्चों को मेचिंग में रखना ही पसंद करते हैं, जैसे ड्रेस वैसे मौजे, जूते, रूमाल वगैरह।

इसके अलावा नए खिलौने, गेम्स जो भी प्रचलन में होते हैं, बच्चों की फरमाइश पर हाजिर हो जाते हैं। जब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते हैं, तब भी फैशन के बैगए कम्पास, पेंसिल, रबर लाकर ही दिए जाते हैं। उनके पास नहीं भी होते हैं, तो वे अपने दोस्तों के पास देखकर आकर्षित होते हैं और नई-नई चीजें लाने की मांग करते हैं।
समय के साथ चलती यह जागरुकता ही कहिए जिससे वे स्वयं को अलग सा दिखाना चाहते हैं और अपने को नए रूप में स्थापित करना चाहते हैं। सबके आकर्षण का केंद्र बन सके, दोस्तों के दिल में समां सके, शिक्षकों व  रिश्तेदारों की प्रशंसा पा सके, इसलिए वे जमाने के नित नए फैशन को अपनाना चाहते हैं।
वे सोचते हैं कि वर्तमान में जो फैशन चल रहा है, अगर उसे नहीं अपनाएंगे तो हम ओल्ड फैशन की उपाधि से अलंकृत हो जाएंगे। लेकिन कई बार वे यह नहीं सोच पाते हैं कि जो भी फैशन चल रहा उससे मा-बाप और निकटवर्ती लोगों में हमारी छवि कैसी बनेगी। यह भी है कि फैशन के इस दौर में फैशन के साथ चलने के लिए बच्चे ब्रांडेड कंपनी की वस्तुओं को ही ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

जैसे-जूते यदि ब्रांडेड कंपनी के हों चाहे वह कम पसंद आ रहे हैं और वहीं दूसरे लोकल ब्रांड जूते उससे कहीं अच्छे भी हों तो भी जागरुक बच्चे ब्रांडेड कंपनी के जूते ही पहनना पसंद करेंगे। इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता है कि साफ.सुथरे, सलीके से तैयार बच्चे सभी को अच्छे लगते हैं। वे अनायास ही सबको आकर्षित कर लेते हैं।

एक पहलू यह भी है कि यदि बच्चे फैशन के अनुसार न रहें या जिस माहौल में वे रह रहे हैं, उसके अनुरूप स्वयं को ढाल न पाएं तो उनमें हीन भावना जल्दी ही घर कर जाती है और उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। यदि बच्चे इस स्थित में पहुंच जाएं तो उनके लिए सफलता पाना अत्यंत ही कठिन हो जाता है। अत: फैशन के साथ चलना आज की आवश्यकता बन गया है। ऐसे में जरूरत है कि फैशन के साथ चलिये लेकिन अंधे मत दौडिए। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे फैशन संबंधि अपने अनुभवों से बच्चों को सही-गलत का ज्ञान दे। तभी बच्चे सही दिशा में बढ़ पाएंगे।

सोमवार, 9 जनवरी 2012

तेंदुलकर के मुकाबले भारतीय क्रिकेट का क्या मिला ?


सचिन तेंदुलकर नाम आज किसी का मोहताज नहीं है। क्रिकेट की शायद ही कोई उपलब्धि है जो इस महान क्रिकेटर को नहीं मिली हो। उपलब्धियों के साथ ही धन व ऐश्वर्य की बात तो पूछो ही मत। अब इन्हीं उपलब्धियों के चलते मास्टर ब्लास्टर सचिन को भारत रत्न देने तक की बात होने लगी है लेकिन सचिन से भारतीय क्रिकेट को क्या मिला। यह बात भी गौर करने लायक है जब सचिन भारतीय क्रिकेट में नहीं रहेंगे तो उनकी उपलब्धियां व उनका कमाया धन उनको किसी तरह की कमी नहीं होने देगा लेकिन सचिन के न रहने से भारतीय क्रिकेट का क्या होगा। इस पर सोचने वाली बात है। भारत ने क्या पाया, क्रिकेट ने क्या पाया, सब कुछ तो सचिन तेंदुलकर ने पाया है, इसलिए इस प्रश्न का उत्तर ईमानदारी के साथ आना चाहिए कि भारत को क्या मिला। यह प्रश्न सचिन तेंदुलकर और उनके उन समर्थकों से है जो केवल सचिन तेंदुलकर की उपलब्धि के नाम पर नाच रहे हैं और वह उस सच्चाई से दूर भाग रहे हैं जिसमें भारत का खाता खाली पड़ा हुआ है। 

देखा गया है कि जब भी किसी प्रतिष्ठापूर्ण मैच में भारत फंंसा है तब तेंदुलकर साहब एक रन बनाकर या जीरो पर आउट होकर पेवेलियन पर आकर बैठ गए और उस फंसे हुए मैच को अंतिम तीन चार विकटों के साझेदारों ने निकाला। ऐसे कितने उदाहरण हैं जिनका उल्लेख यहां किया जा सकता है। जब अकेले सनत जयसूर्या के बल्ले के दम पर श्रीलंका विश्वकप का सिरमौर हो सकता है तो भारत क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के बल्ले के दम पर विश्वकप का सिरमौर क्यों नहीं हो पाया। दुनिया में इन दो दशकों में क्रिकेट के पंडितों ने तेंदुलकर की महिमा का बखान करने में बड़े बड़े ग्रंथों को पीछे छोड़ दिया है लेकिन भारतीय क्रिकेट पर किसी ने नहीं लिखा। किसी दूसरे देश की धरती पर जब भारतीय क्रिकेटर खेलते हैं तो वह तेंदुलकर, गांगुली, सहवाग, धोनी या सिद्धू नहीं खेलते हैं तब भारत खेलता है। जब भारत जीतता है तो कहते हैं कि तेंदुलकर की बदौलत जीत गया और जब भारत हारता है तो उसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं होता। यहां तेंदुलकर जीतता है और भारत हारता है। तेंदुलकर ने दोहरा शतक लगाया पर भारत के काम न आया यह एक अपवाद है लेकिन अधिकांशतया तेंदुलकर की क्रिकेटरी उपलब्धियां भारत के काम न आ सकीं। हर एक महत्वपूर्ण अवसरों पर इस खिलाड़ी ने भारतीय जनमानस को भारी निराश किया है इसलिए वह बारह हजार रन बना ले बारह हजार शतक बना ले इससे क्या हुआ भारत तो नहीं जीता। 

भारतीय मीडिया धन्य है। ध्यान रहे कि दूसरे देशों में आज भी भारतीयों को अभी एक गाली से अभी मुक्ति नहीं मिली है, भले ही पूरा हिंदुस्तान दुनिया में अपनी उपलब्धियों का डंका बजाता हुआ घूम रहा हो। मीडिया ने इसी प्रकार क्रिकेट खिलाडिय़ों को भी महिमा मंडित करके ऐसे उपनामों से नवाजा है कि जिसमें तेंदुलकर जैसे क्रिकेट खिलाड़ी अपने देश को भूलकर रनो के पीछे दौडऩे लगे और भारत रनआउट हो गया।

रविवार, 8 जनवरी 2012

सोश्यल नेटवर्किंग, सैक्स और सर्वें

सोश्यल नेटवर्किंग की वजह से लोगो में अंतरंग संबंधों पर आए बदलाव को लेकर किए गए सर्वें में चौकाने वाले तथ्य सामने आए है। अमेरिका की एक पत्रिका की ओर से किए गए सर्वें में वहां के लोगो ने माना की सोश्यल नेटवर्किंग के कारण उनके अंतरंग संबंध तेजी से स्थापित हुए है।

इस सर्वे के अनुसार हर 5 में 4 महिलाएँ और हर 5 में से 3 पुरूष स्वीकार करते हैं कि सोश्यल नेटवर्किंग की वजह से वे सेक्स के प्रति अधिक उत्साह प्रदर्शित करते हैं. वस्तुत: सोश्यल नेटवर्किंग की वजह से आपसी संबंध तेजी से बनते हैं और लोग डेटिंग पर जाने के लिए साथी की तलाश आसानी से कर पाते हैं.


क्या आज का प्रेम डिजिटल हो गया है?
अमेरीका के शेप एंड मैंस फिटनेस पत्रिका के सर्वे के अनुसार अमेरीका के पुरूष फोन कॉल करने की बजाय 39% बार एसएमएस का सहारा लेते हैं और महिलाएँ 150% बार. सेक्स के लिए प्रोत्साहित करने या आग्रह करने के लिए एसएमएस और फेसबुक संदेशों का सहारा लिया जाता है.


यही नहीं सेक्स के दौरान भी लोग सोश्यल मीडिया से अपना नाता नहीं तोड पाते. करीब 5% लोगों ने स्वीकार किया कि सेक्स के दौरान एसएमएस आने या फोन कॉल आने पर वे रूक कर पहले फोन खंगालते हैं.


कुछ लोग तो इससे भी आगे बढकर सेक्स के दौरान भी अपना सोश्यल नेटवर्किंग स्टेटस अपडेट करना नहीं भूलते

तकनीक बूम के नाम रहा साल 2011

आधुनिक हाईटेक युग में तकनीक पल प्रति पल अपना रूप बदलकर पहले से कही उन्नत होती जा रही है। कुछ तकनीक लोगों को पंसद ही नहीं बेहद पसंद आती है जबकि कुछ अपना कोई खास असर नहीं छोड पाती है। इस लिहाज से देखे तो बीता वर्ष 2011 जहां तकनीकी बूम वाला रहा, वहीं अनेक तकनीकी गैजेट ने लोगों को अपना दिवाना बना दिया। यहा बीते साल की मुख्य उपलब्धियों को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।

टैबलेट

सन् 2011 में आइपैड के साथ शुरु हुआ टैबलेट कम्प्यूटर का क्रेज 2011 में भी जारी रहा। एपल ने अपने टैबलेट कम्प्यूटर आइपैड का नय्ाा मॉडल आइपैड 2 जारी किय्ाा। लास वेगास में हुय्ो कंज्य्ाूमर इलैक्ट्रॉनिक्स शो में लगभग 75 नय्ो टैबलेट पेश किय्ो गय्ो। इनमें सबसे ज्य्ादा चर्चित रहा मोटोरोला का जू़म टैबलेट जो कि एण्ड्रॉइड के टैबलेट हेतु बनाय्ो गय्ो विशेष संस्करण 3 (हनीकॉम्ब) य्ाुक्त पहला टैबलेट था। इसके बाद पूरे वर्ष 10 इंच स्क्रीन वाले हनीकॉम्ब य्ाुक्त कई 3जी टैबलेट आय्ो। हाल ही में एण्ड्रॉइड का नवीनतम संस्करण 4 (आइसक्रीम सैंडविच) भी जारी हुआ जिसमें कि हिन्दी भाषा का समर्थन भी शामिल है। आसुस नामक कम्पनी ने पहले क्वाड कोर प्रोसैसर य्ाुक्त टैबलेट की घोषणा भी की है जो कि सन् 2012 के शुरु में आने की उम्मीद है। आसुस के इस टैबलेट को कीबोर्ड डॉक पर लगाकर लैपटॉप का रूप भी दिय्ाा जा सकता है। ईकॉमर्स वेबसाइट अमेजन भी किंडल फाय्ार नामक अपना टैबलेट लेकर आय्ाी।

भारत में बीते वर्ष सस्ते टैबलेट बाजार में प्रतिस्पर्धा रही। रिलाय्ांस के 3जी टैब, बीटल मैजिक, मर्करी एमटैब आदि सहित कई सस्ते जिंजरब्रैड संस्करण वाले टैबलेट आय्ो। डाटाविंड कम्पनी का 2500 रुपय्ो कीमत का आकाश (सरकार द्वारा विद्यार्थिय्ाों के लिय्ो बनवाय्ाा गय्ाा) तथा 3000 रुपय्ो कीमत का य्ाूबीस्लेट (सामान्य्ा बिक्री हेतु बनाय्ाा गय्ाा) टैबलेट भी आय्ाा। वहीं चीन में लगभग 5000 रुपय्ो कीमत का एमआईपीएस टैक्नोलॉजी नामक कम्पनी द्वारा निर्मित 1 गीगाहटर््ज प्रोसैसर तथा आइसक्रीम सैंडविच य्ाुक्त सस्ता टैबलेट भी सामने आय्ाा।

स्मार्टफोन

स्मार्टफोन की बात करें तो सैमसंग ने साल 2010 के अपने सुपरहिट मॉडल गैलैक्सी एस का नय्ाा मॉडल गैलैक्सी एस 2 पेश किय्ाा जिसमें कि 1.2 गीगाहटर््ज का ड्य्ाूल कोर प्रोसैसर है। य्ाह मॉडल भी अपने पूर्ववर्ती की भाँति काफी सफल रहा। मोटोरोला ने एट्रीक्स 4जी नामक स्मार्टफोन पेश किय्ाा जो कि एक डॉक के साथ लगाने पर कम्प्य्ाूटर की तरह कायर््ा करता है। गूगल ने भी आइसक्रीम सैंडविच वाला पहला स्मार्टफोन नैक्सस एस पेश किय्ाा। एपल भी पीछे नहीं रहा तथा उसने आइफोन का नय्ाा संस्करण आइफोन 4एस जारी किय्ाा। 2012 में सैमसंग के गैलैक्सी एस का तीसरा संस्करण भी आने वाला है जिसमें 1.8 ड्य्ाूल कोर (य्ाा क्वाड कोर) प्रोसैसर, 2 जीबी रैम, एचडी स्क्रीन तथा 3डी होने की उम्मीद है।

लैपटॉप

लैपटॉप के क्षेत्र में भी नय्ाी तकनीक ने दखल दिय्ाा। इंटैल के सैंडीब्रिज टैक्नोलॉजी वाले सैकेंड जैनरेशन के कोर प्रोसैसरों ने पहले वालों का स्थान लिय्ाा। ब्ल्य्ाुटूथ 3.0 तथा य्ाूएसबी 3.0 पोर्टों का आगमन हुआ। लैपटॉप में भी एलसीडी डिस्प्ले का स्थान एलईडी ने ले लिय्ाा। इस साल लैपटॉप के क्षेत्र में भी नय्ाी शुरुआत हुय्ाी। एपल के मॅकबुक एय्ार की तर्ज पर इंटैल ने अल्ट्राबुक नाम से लैपटॉप के लिय्ो स्पैसिफिकेशन जारी की। सरल शब्दों में कहें तो अल्ट्राबुक एक लाइटवेट अल्ट्रापोर्टेबल लैपटॉप है। अल्ट्राबुक की स्पैसिफिकेशन में 13.3 इंच स्क्रीन, अधिकतम 0.8 इंच मोटे, अधिकतम 1.4 किलोग्राम भारी, कम से कम पाँच घंटे की बैट्री लाइफ तथा हार्ड डिस्क के स्थान पर सोलिड स्टेट ड्राइव शामिल हैं। य्ो स्लिम, पतले, हल्के एवं आकर्षक होते हैं तथा इनमें सीडी-डीवीडी ड्राइव नहीं होती। एसर, एचपी, आसुस, तोशिबा, लेनोवो तथा सोनी ने अल्ट्राबुक लॉन्च की हैं। इंटैल अल्ट्राबुक के लिय्ो सैंडीब्रिज के स्थान पर आइवी ब्रिज नामक विशिष्ट प्रोसैसर तैय्ाार कर रहा है। फिलहाल इनमें सैंडीब्रिज मोबाइल प्रोसैसर प्रय्ाोग हो रहा है। अल्ट्राबुक अभी काफी महंगी हैं, लगभग 50,000 रुपय्ो के आसपास। लगभग इतनी ही कीमत से मॅकबुक एय्ार के मॉडल शुरु होते हैं तो कोई इन्हें क्य्ाों खरीदेगा। जब तक इनकी कीमत नीचे नहीं आती, आम उपभोक्ता इनसे दूर ही रहेगा।

क्रोम ओएस य्ाुक्त गूगल की क्रोमबुक भी आय्ाी पर उन्हें कोई खास रिस्पॉन्स नहीं मिला। इंटरनेट की अनिवायर््ाता के चलते भारत में तो य्ो फिलहाल कामय्ााब ही नहीं।

टेलीविजन

पिछले कुछ सालों से एलसीडी टेलीविजन का क्रेज बढ़ गय्ाा है। 2011 में एलईडी का दौर आय्ाा। एलईडी की पिक्चर क्वालिटी एलसीडी की तुलना में बेहतर तो है ही, इनकी बिजली खपत भी कम है। लोगों ने अपने पुराने बड़े टेलीविजनों से छुटकारा पाकर दीवार पर टाँगे जा सकने वाले एलईडी खरीदे। इसके अतिरिक्त हाइ-डैफीनीशन के प्रति जागरूकता भी बघ्ी तथा अब लोग फुल एचडी टीवी खरीदना पसन्द कर रहे हैं। एलजी ने 2.9 मिलीमीटर मोटा दुनिय्ाा का सबसे पतला टीवी भी बनाय्ाा जो कि फुल एचडी है। पहले एल जी तथा बाद में कुछ दूसरी कम्पनिय्ाों ने 3डी टीवी भी बनाय्ो पर य्ो ज्य्ाादा चले नहीं। इसका कारण शाय्ाद 3डी सामग्री की कमी तथा चश्मे का झंझट है। इसी साल तोशिबा ने अपना 3डी टीवी भी प्रस्तुत किय्ाा जिसे देखने हेतु चश्मे की जरूरत नहीं।

डैस्कटॉप

डैस्कटॉप के क्षेत्र में कोई विशेष नय्ाी चीज देखने को नहीं मिली। इनमें भी इंटैल के सैंडीब्रिज टैक्नोलॉजी वाले सैकेंड जैनरेशन प्रोसैसर तथा य्ाूएसबी 3.0 पोर्ट आय्ो। एलसीडी मॉनीटर की जगह धीरे-धीरे एलईडी ने लेनी शुरु की। सैमसंग द्वारा माइक्रोसॉफ्ट के लिय्ो बनाय्ाा गय्ाा एसयूआर 40 कम्प्य्ाूटर सामने आय्ाा जो कि 40 इंच की फुल एचडी टचस्क्रीन य्ाुक्त है हालाँकि य्ाह केवल एण्टरप्राइज प्रय्ाोग के लिय्ो है, सामान्य्ा उपभोक्ताओं के लिय्ो नहीं।

अन्य्ा हार्डवेय्ार

ब्ल्य्ाूटुथ, य्ाूएसबी तथा स्टोरेज डिवाइसों में बेहतरी देखने को मिली। नय्ो कम्प्य्ाूटर य्ाूएसबी 3.0 आने लगे हैं जो कि न केवल य्ाूएसबी 2.0 से काफी तेज डाटा ट्राँसफर स्पीड प्रदान करता है बल्कि इसमें एक साथ डाटा भेजा एवं प्राप्त किय्ाा जा सकता है। ब्ल्य्ाूटुथ 3.0 य्ाुक्त लैपटॉप भी आय्ो। ब्ल्य्ाूटुथ का संस्करण 4.0 भी घोषित हो चुका है। एपल ने भी अपना हाइ-स्पीड थंडरबोल्ट पोर्ट बनाय्ाा जो कि उसके डैस्कटॉप एवं लैपटॉप में उपलब्ध है।

ऑपरेटिंग सिस्टम

डैस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टमों के क्षेत्र में माइक्रोसॉफ्ट ने विण्डोज के नय्ो संस्करण विण्डोज़ 8 की घोषणा की और इसका डैवलपर प्रिव्य्ाू जारी किय्ाा। विण्डोज़ 8 में विण्डोज़ फोन वाला मैट्रो इंटरफेस है। य्ाह संस्करण डैस्कटॉप के अतिरिक्त टैबलेट पर भी चलेगा। लिनक्स की दुनिय्ाा में ग्नोम डैस्कटॉप का नय्ाा संस्करण 3 आय्ाा जिसमें कि फाय्ारफॉक्स की तरह एक्सटेंशन सुविधा है। दो सबसे लोकप्रिय्ा लिनक्स वितरण उबुंटू एवं लिनक्स मिंट के अलावा य्ाह फेडोरा में भी आ चुका है। साथ ही उबुंटू का विकास करने वाली कम्पनी कैनॉनिकल ने घोषणा की है कि 2014 में वह उबुंटू का स्मार्टफोन एवं टैबलेट पर चलने वाला संस्करण भी जारी करेगा।

मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टमों के क्षेत्र में एण्ड्रॉइड का नय्ाा संस्करण 4 (आइसक्रीम सैंडविच) चर्चित रहा। य्ाह संस्करण स्मार्टफोन एवं टैबलेट दोनों के लिय्ो संय्ाुक्त रूप से बनाय्ाा गय्ाा है। इसमें एक अच्छी बात य्ो भी है कि हिन्दी का समर्थन आ गय्ाा है। इस साल एपल ने भी आइफोन, आइपैड तथा आइपॉड टच में प्रय्ाुक्त होने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम आइओएस का नय्ाा संस्करण 5 निकाला जिसके साथ हिन्दी वालों को हिन्दी कीबोर्ड का उपहार मिला। एचपी के वेबओएस के लिय्ो य्ाह साल अच्छा नहीं रहा तथा एचपी ने आगे से वेबओएस वाले डिवाइस बनाना बन्द करने की घोषणा की। इसके अलावा नोकिय्ाा ने भी सिम्बिय्ान को अलविदा कह माइक्रोसॉफ्ट से गठबन्धन कर आगे से विण्डोज़ फोन वाले स्मार्टफोन बनाने की घोषणा की।

इंटरनेट एवं सोशल नेटवर्किंग

फेसबुक और ट्विटर की प्रतिस्पर्धा के बीच गूगल ने अपना सोशल नेटवर्किग प्लेटफॉर्म गूगल$ भी लांच किय्ाा। य्ाह पूरी तरफ फ्लॉप तो न हुआ पर बहुत सफल भी न रहा। इस बीच फेसबुक व ट्विटर भी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते अपने इंटरफेस में बदलाव एवं नय्ाी सुविधाय्ों लाते रहे। ट्विटर जहाँ फोटो अपलोडिंग की सुविधा लाय्ाा वहीं फेसबुक में वीडिय्ाो कॉलिंग सुविधा आय्ाी।

बीते साल क्लाउड कम्प्य्ाूटिंग का भी बोलबाला रहा। अधिकतर मोबाइल प्लेटफॉर्म क्लाउड कम्प्य्ाूटिंग की तरफ बढ़ रहे हैं। एपल ने आइफोन, आइपैड तथा मैक के लिय्ो आइक्लाउड सुविधा की घोषणा की जिससे सभी डिवाइसों का डाटा क्लाउड पर सिंक किय्ाा जा सकता है। फाय्ारफॉक्स, क्रोम आदि ब्राउजरों ने भी य्ाूजर का डाटा (बुकमार्क, हिस्ट्री, सैटिंग्स आदि) सिंक करने की सुविधा प्रदान की। गूगल डॉक्स की प्रतिस्पर्धा में माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने ऑफिस सुइट का ऑनलाइन संस्करण जारी किय्ाा।

कुछ अन्य्ा उल्लेखनीय्ा गैजेटों में सोनी द्वारा प्रस्तुत 3डी कैमकॉर्डर शामिल है जो कि 3डी वीडिय्ाो शूट करने वाला पहला कैमकॉर्डर है। य्ाह मार्च 2012 के आसपास आने की उम्मीद है। एंग्री बडर््स की भी 2011 में धूम रही। 2009 में आइफोन एप्लिकेशन के तौर पर शुरु हुय्ाी य्ाह ऑनलाइन गेम अब एण्ड्रॉइड के अलावा क्रोम वेब ब्राउजर एवं ऑनलाइन वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। साल 2011 तकनीकी क्षेत्र के दो दिग्गजों सी एवं य्ाूनिक्स के जनक डैनिस रिची तथा एपल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की मृत्य्ा का गवाह भी रहा। कुल मिलाकर साल 2011 तकनीकी विकास के लिहाज से उपलब्धिपूर्ण रहा। य्ाह विकास अगले साल भी जारी रहने की उम्मीद है तथा नय्ो बेहतर गैजेट देखने को मिलेंगे।

शनिवार, 7 जनवरी 2012

ध्यान से भोजन करना बना सकता है आपको छरहरा


क्या आप मोटापे से जूझ रहे हैं, तो यह अध्ययन आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ध्यान से भोजन करना छरहरा होने का राज है। शोधकर्ताओं का कहना है कि भोजन करते समय खुद को भटकाव से दूर करना और पूरा ध्यान खाने पर केंद्रीत करना आपकों छरहरा बनान में मददगार साबित हो सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस तरह ध्यान से भोजन करने से मस्तिष्क शरीर के साथ तालमेल बैठा लेता है जिससे वह तृप्त होने के रासायनिक संदेश को सुन पाता है। 
हार्वर्ड विश्वविद्यालय में किए गए तथा कई अन्य अध्ययनों में पाया गया कि जो लोग आस-पास हो रही गतिविधियों की बजाय खाने पर ध्यान देते हैं उनका वजन औसतन ६.३ किलोग्राम से ज्यादा कम हो जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र के बीच हार्मोन के संकेतों की एक जटिल श्रृंखला है तथा मस्तिष्क तक यह संदेश पहुंचने में करीब २० मिनट लगते हैं कि शरीर ने पर्याप्त भोजन कर लिया है। इसका मतलब है यदि कोई जल्दी जल्दी में भोजन करता है तो संकेत देर से पहुंचेंगे और अधिक भोजन किया जाएगा।

गुरुवार, 5 जनवरी 2012

इंटरनेट और साइबर क्राइम


इंटरनेट आधुनिक विश्व में सूचना, शिक्षा और मनोरंजन की त्रिवेणी है। यह एक अन्त: क्रिया  (Interaction) का बेहतर और सर्वाधिक सस्ता माध्यम है। इंटरनेट ने जहां सूचना के माध्यम से आदान प्रदान कर मानव जीवन की जटिलताओं को कम किया है तथा भौगोलिक सीमाओं को नगन्य सा कर दिया है। इसके इन्हीं प्रभावों व फैसबुक आदि के चलते इंटरनेट आज घर-घर की पसंद बन गया है वहीं इसके दूसरे प्रभाव घातक है। इसका कारण साइबर क्राइम है। तकनीक के साथ साथ इंटरनेट जितना सरल व सुलभ होता जा रहा है, साइबर क्राइम भी वैसी गति से बढ़ रहा है। इसलिए जरूरत है सजक रहने की।
इंटरनेट दुनिया भर में फैले कम्प्यूटरों का एक विशाल सजाल है, जिससे ज्ञान एवं सूचनाएं भौगोलिक एवं राजनीतिक सीमाओं का अतिक्रमण करते हुए अनवरत प्रवाहित होती रहती है। इंटरनेट के विश्वव्यापी जाल पर सुगमता से अद्यतन सूचनाएं प्राप्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त यदि अपने पास ऐसी कोई सूचना है जिसे हम सम्पूर्ण दुनिया में  प्रसारित करना चाहें तो उसका हम घर बैठे इंटरनेट से वैश्विक स्तर पर विज्ञापन कर सकते हैं। इंटरनेट पर सब कुछ अच्छा ही नहीं है। उसे माध्यम बनाकर आर्थिक और सामाजिक अपराध भी किए जाते हैं। ई-मेल से वायरस, स्पाईवेयर और एडवेयर भेजना, लोगों को झूठे प्रलोभन देकर धन मंगवाना, बैंकों और क्रेडिट कार्डों के आंकड़े पासवर्ड आदि चुराकर उनका दुरूपयोग करना, लोगों की निजी सूचनाएं चुराना, बच्चों और महिलाओं के साथ यौन व्यवहार करना आदि साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है। 

इंटरनेट का प्रारंभ आज से लगभग साढ़े तीन दशक पूर्व अमेरिका के रक्षा विभाग के एक शोध प्रकल्प के रूप में हुआ। सन् 1992 के बाद इंटरनेट पर ध्वनि एवं विडियों का आदान प्रदान संभव हो गया।

साइबर क्राइम का एक अन्य रूप है-हैकिंग। इसका अर्थ है किसी सर्वर, वेबसाइट या ई-मेल प्रणाली का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेना। इन घटनाओं में कई बार संवेदनशील आंकड़े चुरा लिए जाते हैं जिनका दुरूपयोग किया जाता है। न केवल भारत के परिपेक्ष्य में बल्कि सम्पूर्ण विश्व में इंटरनेट का दुरूपयोग करते हुए आतंकवादी संगठनों द्वारा कई विध्वंसकारी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। इंटरनेट अपराधियों से बचने के लिए सावधानी बहुत जरूरी है। अलबता कम्प्यूटर अच्छे एंटी वायरस, एंटी-स्पाईवेयर और फायरवाल साफ्टवेयरों का प्रयोग कर हम काफी हद तक इनसे बच सकते हैं। ई-मेल, वेबसाइटों आदि में दिए जाने वाले लिंक्स पर आंख मूंदकर क्लिक नहीं करना चाहिए और सुरक्षा के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हुए बिना वेबसाइटों से साफ्टवेयर, विडियो, फाइलें आदि डाऊनलोड नहीं करना  चाहिए।

गाते ही नहीं, सपने भी देखते है पक्षी


पक्षियों को भी इंसानों की तरह आराम और अच्छी नींद की जरूरत होती है। हाल ही में हुए एक शोध में ये बात सामने आई है। इसके मुताबिक गहरी नींद के बाद पक्षियों के चहचहाने, गुनगुनाने और गाने की क्षमता न सिर्फ बढ़ जाती है बल्कि उनकी आवाज भी सुरीली हो जाती है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, बेसुरे पक्षी की आवाज भी सुबह में बड़ी प्यारी होती है। इसकी वजह नींद में पक्षियों का अभ्यास करना है। हालांकि सुबह उनकी आवाज में थोड़ी लड़खड़ाहट भी होती है। लेकिन कुछ ही देर में उनका बिगड़ा सुर सुरीला बन जाता है और वे सधे गायक बन जाते हैं। इसकी वजह पक्षियों में सुनने और गुनगुनाने की प्रक्रिया का लगातार अभ्यास करना भी है। जब पक्षियों का मस्तिष्क गीत सीखने के लिए अच्छी तरह परिपक्व हो जाता है, वे बड़ों का गीत ध्यानपूर्वक सुनकर उसकी नकल भी उतारते हैं। कई पक्षियों में दूसरे पक्षियों की आवाजों की हूबहू नकल उतराने की क्षमता भी होती है। गीत गाने वाले पक्षियों में सीखने की प्रक्रिया इंसान की बोली के विकास की तरह ही होती है। गाने की नकल करने के पहले नए पक्षी भी तुतले और कर्कश ध्वनि में आवाज निकालते हैं। ठीक उसी तरह जैसे कोई बच्चा शब्दों को बोलने के पहले तुतलाता है। अनुसंधानकर्ताओं के मुताबिक किशोर पक्षियों में नींद के दौरान दिलचस्प घटनाएं घटती हैं। गहरी नींद में सोते ही उनमें सपने की तरह गीत का अभ्यास शुरू हो जाता है लेकिन यह वहां से आरंभ नहीं होेता है, जहां से उन्होंने रात के पहले गाना बंद किया था। बल्कि हर रोज एक नई प्रक्रिया शुरू होती है जो धीरे-धीरे उन्हें श्रेष्ठतम गायक बनाती है। हालांकि यह रहस्य अभी भी पूरी तरह उजागर नहीं हुआ है। लेकिन अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि गायन के दौरान मस्तिष्क के जिस हिस्से का उपयोग होता है, वह रात्रि के दौरान सक्रिय हो जाता है। 

न्यूरॉन जो कि पक्षियों के गायन के समय सक्रिय होता है, रात के दौरान ज्यादा सक्रिय हो जाता है। इसीलिए यह संभव है कि रात को पक्षी गाने के बारे में सपने देखते हैं। लेकिन हैरानी में डालने वाली बात यह है कि पक्षी गहरी नींद के दौरान अगर गीत का अभ्यास कर रहे होते हैं तो फिर सुबह उसकी आवाज तुतला क्यों हो जाती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसकी वजह बिना किसी निर्देशन या टीका टिप्पणी के स्वयं अभ्यास करना हो सकता है। सपने में पक्षी अपना गीत नहीं सुन पाते हैं क्योंकि तब किसी तरह की ध्वनि उत्पन्न नहीं होती है। इसीलिए उनके लिए यह समस्या होती है, क्योंकि उन्हें ध्वनि के बारे में प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। हालांकि यह पहले ही साबित हो चुका है कि बड़े पक्षी जो अपनी आवाज सुन नहीं पाते हैं, जल्द ही टूटा-फूटा गाना सीख लेते हैं। यही सिद्धांत सपने देखने वाले युवा पक्षियों पर भी लागू होता है। उसकी आवाज इसलिए बिगड़ जाती है, क्योंकि वे स्वयं की आवाज सुन नहीं पाते हैं। जिन पक्षियों की आवाज रात के दौरान खराब हो जाती है वे अच्छे गायक साबित होते हैं, क्योंकि इस दौरान उनका दिमाग सर्वाधिक लचीला होता है।

बुधवार, 4 जनवरी 2012

जब पेन नहीं था तो कैसे काम करते थे लोग ?


 कलम की ताकत से पूरी दुनिया वाकिफ है। आधुनिक युग में यह विचारों की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब पेन का अविष्कार नहीं हुआ था तो लोग अपने विचार कैसे दर्ज करते थे? और मानव की कौन सी जरूरतों से पेन का अविष्कार हुआ। आइए एक नजर डालते हैं पेन के अविष्कार और उसके विकास के सफर पर। इसमें कोई दो राय नहीं कि मनुष्य की सोचने की क्षमता इस आधुनिक युग का पथ है। उस सोच को शब्द देने के लिए प्राचीन काल के लोग नुकीली छैनी से अपने विचारों को तस्वीरों या चिन्हों के रूप में गुफाओं की दीवारों पर खुरचते थे। इसके बाद वह पौधों के रस या जानवरों के खून में अपनी उंगलियां डुबाने लगे ताकि उन्हें कलम के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। फिर मिट्टी और चाक टुकड़ों को इस काम के लिए प्रयोग किया गया। चीनी तो अपने खेतों को ऊंटों के बालों से बने ब्रश से पेंट करते थे। जबकि कुछ दशक पहले तक सरकंडे की कलम का इस्तेमाल किया जाता था। तख्ती पर आज भी उसी से लिखा जाता है। इंसान की इसी सोच ने पेन का जन्म दिया। वैसे सभ्यता के विकास में लिखने की कला की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके जरिए मानव अपने विचारों और कारनामों को रिकॉर्ड कर सकता है।


आधुनिक पेन जिसे हम सभी आज इस्तेमाल करते हैं सबसे पहले किसने बनाया? 

इसका किसी के पास ठोस जवाब नहीं है। लेकिन इस दिशा में पहला नाम मिस्र के लोगों का आता है। वे एक कॉपर के टुकड़े को, जो आधुनिक स्टील पेन पाइंट की तरह होता था, एक खोखली स्टैप के सिर पर बांध कर पेन की तरह इस्तेमाल करते थे। वैसे हाथ से खत लिखने का सिलसिला यूनानियों ने सबसे पहले लगभग 4000 साल पहले शुरू किया था। वे धातु हड्डी और हाथी दांत से बने पेन का प्रयोग करते थे और उससे मोम चढ़ी शिलाओं पर लिखते थे। इसके बाद उन्होंने ट्यूब जैसे खोखली श्रवास से एक स्पलिंट पेन बनाया जिसे इंक में डुबोकर लिखने के लिए काम में लाया जाता था।

लेकिन अभी तक कागज का आविष्कार नहीं हुआ था। मध्य युग में कागज का आविष्कार हुआ, उस वक्त तक आदमी बत्तख, कौवे या हंस के परों को कलम के रूप में प्रयोग करने लगा था। उसकी टिप को नुकीला बनाकर बीच में से फाड़ दिया जाता था ताकि इंक चैनल से बहकर कागज पर आ जाए। लेकिन कलम का पेन नाम किस तरह पड़ा इसके पीछे भी एक कहानी है। पेन लातिनी भाषा के पैन्ना शब्द से बना है। जिसका अर्थ है पंख यानी पर। पुरातत्वविदों के मुताबिक 1 हजार बरस तक लोगों ने परों के पेन से ही लिखा।

1780 में सबसे पहले इंग्लैंड में स्टील पेन बने, लेकिन इन्हें शोहरत इसके 40 साल बाद मिली। फाउंटेन पेन अमेरिका में 1880 में बनना शुरू हुआ। इनका निब आमतौर पर 14 कैरेट सोने का बना होता था और उस पर इरीडियम चढ़ा होता था ताकि कागज को बिना फाड़े आसानी से लिखा जा सके। आजकल तो बाल पाइंट पेन का ही चलन है। इसका आविष्कार 20वीं शताब्दी में हुआ और इसका फाइंट क्रोम स्टील से बना होता है। इसलिए तो यह इतना सस्ता है।

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

अब थारी म्हारी करेंगे बिग बच्चन और मास्टर ब्लास्टर सचिन


अब वह दिन दूर नहीं जब बॉलीबुड के विश्वविख्यात अभिनेता बिग बी अमिताभ बच्चन और क्रिकेट के भगवान सचिन तेन्दूलकर थारी म्हारी करते नजर आएंगे। ऐसा इसलिए होगा कि दोनों अब एक-दूसरे के पडोस में मकान बनाने जा रहे है यानि जल्दी ही दोनों एक-दूसरे के नजदीक वाले मकान में रहकर सुबह शाम एक दूसरे से थारी म्हारी अर्थाथ बातचीत करते नजर आएंगे। 
दोनों का बंगला गुजरात के अहमदाबाद नगर से चालीस किलोमीटर दूर कैंसविले गोल्फ एंड कंट्री क्लब (केजीसीसी) में एक साथ बन रहा है।
केजीसीसी के प्रबंध निदेशक और गुजरात कैंसविले चैलेंज गोल्फ टूर्नामेंट के प्रायोजक सैवी ग्रुप के निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि इस गोल्फ कोर्स में जो आवासीय परिसर बन रहे है। उनमें अमिताभ और सचिन के बंगले भी बन रहे हैं । इनके साथ देश के शीर्ष गोल्फर जीव मिल्खा सिंह का भी बंगला भी बन रहा है। यह गोल्फ कोर्स 160 एकड़ में फैला है और इसके आस-पास बन रहे बंगलों में इन तीन दिग्गज हस्तियों के बंगले भी शामिल हैं जो एक से सवा किलोमीटर की दूरी के अंदर होंगे। उन्होनें बताया कि टी-वन के पास बन रहा जीव मिल्खा का बंगला लगभग तैयार हो चुका है जबकि सचिन का बंगला टी-छह और अमिताभ का बंगला टी सात के पास बन रहा है।
अमिताभ और सचिन के बंगले अगले दो वर्षों में बनकर तैयार हो जाएंगे। ये बंगले 1500 वर्ग गज में बन रहे हैं। सचिन के घर के डिजाइन में कुछ परिवर्तन किया जा रहा है। जिससे इसके पूरा होने में दो वर्ष का समय लगेगा। सिन्हा ने कहा अमिताभ और सचिन हालांकि बंगलों में स्थायी रूप से तो नहीं रहेंगे लेकिन वे समय-समय पर अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए यहां जरूर आएंगे।  दोनों ही दो-दो बार कैंसविले गोल्फ कोर्स आ चुके हैं। अमिताभ गत वर्ष पहले गुजरात कैंसविले टूर्नामेंट के अवसर पर इस गोल्फ कोर्स आए थे।

पेट्रोल की रफतार पर चुनाव का ब्रेक


पेट्रोल की बढती रफतार पर पांच राज्यों में होने वाले चुनाव ने ब्रेक लगा दिया है। फिल्हाल चुनाव होने तक पेटोल के दाम नही बढेंगे। सरकार ने तेल कंपनियों को पेट्रोल के दाम फिलहाल न बढ़ाने का इशारा किया है।
सूत्रों के मुताबिक, पांच राज्यों में चुनाव खत्म होने यानी मार्च तक पेट्रोल में मूल्य बढ़ोतरी टल सकती है।
तेल कंपनियों को फिलहाल पेट्रोल पर करीब 2.35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। वे दो रुपये की बढ़ोतरी चाहती थीं, लेकिन सरकार के रुख के बाद अब उन्होंने एक रुपये बढ़ोतरी के लिए हरी झंडी मांगी है।
तेल कंपनियां हर महीने की पहली और 16 तारीख को पखवाड़े के औसत आयात मूल्य के हिसाब से तेल मूल्यों की समीक्षा करती हैं। इस नियम के हिसाब से शनिवार मध्य रात्रि से ही पेट्रोल के नए दाम का ऐलान होना चाहिए था।

सोमवार, 2 जनवरी 2012

फेसबुक पर मोबाइल नम्बर व अपना पता डाल रहे है तो सावधान!


यदि आप फेसबुक पर अपना पता व मोबाइल नम्बर डाल रहे है तो सावधान हो जाए। कही ऐसा न हो कि यह आपके लिए घातक साबित हो। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेताया है कि प्रयोक्ता अपने घर का पता और मोबाइल फोन नम्बर अपनी फेसबुक प्रोफाइल में ना लिखे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ग्राहम क्ल्यूली के अनुसार फेसबुक ने अब थर्ड पार्टी डेवलपरों को प्रयोक्ताओं की प्रोफाइल तक पहुँच बनाकर उनका पता और मोबाइल नम्बर देखने की अनुमति दे दी है। 

जो प्रयोक्ता किसी विशेष थर्ड पार्टी अप्लिकेशन को इंस्टाल करते हैं। उन प्रयोक्ताओं की गोपनीय जानकारियों जैसे कि मोबाइल नम्बर तक उन अप्लिकेशन डेवलपरों की पहुँच हो जाती है। फेसबुक के अनुसार प्रयोक्ताओं के पास यह अधिकार है कि वे अप्लिकेशन को इंस्टाल करते समय यह तय कर सकें कि उन्हें अपने पते और मोबाइल फोन नम्बर की जानकारी देनी है या नहीं। 
परंतु आम तौर पर होता यह है कि प्रयोक्ता अप्लिकेशन इंस्टाल करते समय प्रदर्शित दिशा निर्देशों को ठीक से पढते नहीं और हकारात्मक अनुमति देते रहते हैं और इससे उनकी गोपनीयता खतरे में पड जाती है।
हालाँकि फेसबुक का कहना है कि डेवलपरों की पहुँच मात्र अप्लिकेशनों को इंस्टाल करने वाले प्रयोक्ताओं के पते और मोबाइल नम्बर तक ही उपलब्ध कराई गई है। प्रयोक्ताओं के मित्रों की गोपनीय जानकारियों तक यह पहुँच सम्भव नहीं है।

परन्तु कई साइबर अपराध विशेषज्ञ फेसबुक के इस कदम का कडा विरोध कर रहे हैं। उनके अनुसार फेसबुक ने अपने 50 करोड से अधिक प्रयोक्ताओं की सुरक्षा को खतरे में डाला है। अब कई स्पाम अपराधी जाली अप्लिकेशनों का सहारा लेकर प्रयोक्ताओं के मोबाइल फोन नम्बरों तक अपनी पहुँच बनाएंगे और उसके बाद क्या होगा उसकी कल्पना करना आसान है। इसलिए फेसबुक पर अपने फोन मोबाइल नम्बर व अपना पता डालने से बचे यदि डालना जरूरी लगे तो नियमों को पढ़ते हुए डाले ताकि कोई फेसबुक अकाउंट हैक होने सहित तमाम परेशानियों से मुक्ति मिल सके।

डान 2 की कामयाबी से प्रियंका के लगे पंख

डॉन 2 के हिट होते ही प्रियंका चोपड़ा के नखरे बढ़ गए हैं। कुछ समय पहले तक वो फिल्में ना मिलने के कारण परेशान थीं और अपने बॉयफ्रेंड शाहिद कपूर के साथ उनका ज्यादा समय कट रहा था। लेकिन डॉन 2 ने उनके कैरियर को फिर नई जिंदगी दे दी है। अब वह शाहिद कपूर को ही नखरें दिखा रही हैं और आजकल शाहिद बेकार हैं तो मैडम के पास उनके लिए जरा सा भी वक्त नहीं है। बहुत बिजी हो गई हैं प्रियंका। वे शाहिद को भले वक्त न दे पा रही हों, लेकिन उनकी तरह नखरें करने उन्होंने जरूर सीख लिए हैं। 
जी हां, प्रियंका इन दिनों बर्फी फिल्म में काम कर रही हैं। हर सीन पर अब अपनी मनमानी करने लगी हैं। हर बात में कमी निकालना, चीजों में अपने हिसाब से बदलाव कराना, प्रियंका का नेचर बन चुका है। खबर की माने तो फिल्म बर्फी की यूनिट के सदस्य प्रियंका के इस व्यवहार से काफी परेशान हैं। प्रियंका को हमेशा से ही अनुशासित और मिलनसार माना गया है, लेकिन अब वह काफी बदल चुकीं हैं। 
फिल्म में अपने लुक और मेकअप को लेकर वह हंगामा खड़ा कर देती हैं, शूटिंग के दौरान संवादों में मर्जी से बदलाव कर देती हैं। यहां तक कि निर्देशक को कोई दृश्य दोबारा शूट करने तक को कह देती हैं। इसका फिल्म पर क्या परिणाम क्या होगा, यह इसकी रिलीज पर ही पता चलेगा लेकिन शाहरुख के साथ काम करने से प्रियंका के भाव सातवें आसमान पर पहुंच चुके हैं।

रविवार, 1 जनवरी 2012


नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच
 में बदलने का समय


नए साल 2012 ने हमारे जीवन में अपनी दस्तक दे दी है। नए साल की पहली सुबह पर नया उल्लास, नए संकल्प, नए इरादे और जीवन की नई खुशियां हमारा स्वागत करने को बैताब है तो पिछले वर्ष की कडकी बातों, भूलों, अधूरे कार्यों व जीवन की मुश्किलों का अक्स भी साथ है। ऐसे में समय है कि नए साल की शुरूआत हम अपने भीतर की नकारात्मक सोच को सकारात्मक सोच में बदलकर करे। सकारात्मक सोच जीवन की नई चुनौतियों से लडने में भरपूर उर्जा देगी और  आप नई कार्यों को व नए सकंल्पों को सफलतापूर्वक अंजाम दे पाएंगे। पुरानी गलतियों, कडवी यादों व रिश्तों में आई खटास को सुधारने का भी यह सबसे अच्छा समय है। तो देर मत करिए, क्योंकि नई शुरूआत से बढाया गया आपका एक कदम आपको जीवन के तमाम झंझावतों से मुक्त कर देगा और आप सही मायनों में साल 2012 का आनंद ले पाएंगे।
- राजेन्द्र शर्मा